×
उत्तर प्रदेशगौतम बुद्ध नगरग्रेटर नोएडानोएडानोएडा वेस्टराजनीतिराज्य

‘मैं अब और नहीं जी सकती’ – शारदा यूनिवर्सिटी की छात्रा का भावुक सुसाइड नोट, दो टीचर गिरफ्तार

ग्रेटर नोएडा: शारदा यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा के गर्ल्स हॉस्टल में शुक्रवार शाम दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। बीडीएस सेकंड ईयर की छात्रा ज्योति वर्मा ने अपने हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

शनिवार सुबह छात्रा के परिजन और दर्जनों छात्र यूनिवर्सिटी के बाहर धरने पर बैठ गए। स्थानीय लोग भी प्रदर्शन में शामिल हो गए हैं।

सुसाइड नोट में शिक्षकों पर गंभीर आरोप

छात्रा ने आत्महत्या से पहले छोड़े गए सुसाइड नोट में दो शिक्षकों को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया है। उसने लिखा:

“अगर मेरी मौत हुई तो इसके लिए पीसीपी और डेंटल मेडिकल के टीचर जिम्मेदार होंगे। महेंद्र सर और शार्ग मैम ने मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। मैं उनकी वजह से लंबे समय से डिप्रेशन में थी।”

पुलिस मौके पर, दो आरोपी शिक्षक गिरफ्तार

सूचना मिलने पर थाना नॉलेज पार्क पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस ने छात्रा के परिजनों की तहरीर पर केस दर्ज कर लिया है और दोनों नामजद शिक्षकों को गिरफ्तार कर लिया गया है। एडीसीपी सुधीर कुमार ने बताया कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

छात्रा पर लगाया गया था ‘फेक साइन’ का आरोप

छात्रों ने बताया कि ज्योति पर एक अकादमिक फाइल पर फर्जी साइन करने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद तीन दिनों तक उसे क्लास से बाहर कर दिया गया और माता-पिता को बुलाने का दबाव डाला गया।

शुक्रवार को उसे फाइल वापस मिली, लेकिन वह बहुत डरी और टूटी हुई थी। उसे फेल करने की धमकी दी गई थी, जिससे वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गई थी।

छात्राओं का आरोप – “ना खाना अच्छा, ना सुरक्षा व्यवस्था

एक छात्रा ने बताया कि ज्योति हमारी बैचमेट थी। शुक्रवार शाम वह हमसे मिली थी, तब वह बहुत परेशान लग रही थी।

छात्राओं का कहना है कि हॉस्टल में ना तो खाना अच्छा है और ना ही सुरक्षा व्यवस्था। एक अन्य छात्रा ने आरोप लगाया कि वार्डन ने सुसाइड नोट को छुपाने की कोशिश की थी

छात्र-छात्राओं की मांग – हो निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई

घटना के बाद कैंपस में तनाव का माहौल है। छात्र संगठन और परिजनों की मांग है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिन शिक्षकों पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप है, उन्हें सख्त सजा दी जाए।

निष्कर्ष: मानसिक स्वास्थ्य पर फिर उठे सवाल

ज्योति वर्मा की आत्महत्या न केवल शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति पर सवाल खड़े करती है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की कमी को भी उजागर करती है।

अब देखना यह होगा कि इस गंभीर मामले में प्रशासन कितना पारदर्शी और संवेदनशील रवैया अपनाता है।

 

 

 

Divya Gupta

Tags

Related Articles

Back to top button
Close