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भारत-बांग्लादेश तनाव: पीएम मोदी ने उठाया हिंदू अल्पसंख्यकों का मुद्दा, क्या भारत-बांग्लादेश के सुधरेंगे रिश्ते?

Noida : हाल ही में बैंकॉक में हुए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस की मुलाकात ने राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। इस मुलाकात को भारत-बांग्लादेश संबंधों के एक नए दौर की संभावनाओं से जोड़ा जा रहा है।

कौन हैं मोहम्मद यूनुस?

मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश के एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री हैं, जिन्हें 2006 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने “माइक्रोफाइनेंस” और “माइक्रोक्रेडिट” की अवधारणाओं को वैश्विक पहचान दिलाई। उनका ग्रामीण बैंक (Grameen Bank) मॉडल दुनिया के कई देशों में अपनाया जा चुका है

मुलाकात का मकसद और महत्व

बैंकॉक में आयोजित इस सम्मेलन में दोनों दिग्गजों की भेंट न केवल औपचारिक रही, बल्कि इसमें सामाजिक और आर्थिक सहयोग के मुद्दों पर भी चर्चा की गई। पीएम मोदी ने मोहम्मद यूनुस की ‘ग्रामीण बैंक मॉडल’ की सराहना की, जो गरीबी उन्मूलन और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में मील का पत्थर माना जाता है।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार, मोदी-यूनुस बैठक में उठ सकता है मुद्दा

शेख हसीना सरकार के जाने के बाद भारत-बांग्लादेश रिश्तों में तनाव बढ़ा है। मोहम्मद यूनुस के शासन में बांग्लादेशी हिंदुओं पर अत्याचार के कई मामले सामने आए हैं, जिसे लेकर पीएम मोदी पहले ही चिंता जता चुके हैं। ऐसे में बैंकॉक में दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर असर

हाल के वर्षों में भारत और बांग्लादेश के संबंध कुछ मसलों को लेकर तनावपूर्ण रहे हैं—जैसे रोहिंग्या शरणार्थी संकट, जल बंटवारा, और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दे। ऐसे में मोहम्मद यूनुस और पीएम मोदी की सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण बातचीत दोनों देशों के रिश्तों में एक नई ऊर्जा का संचार कर सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यूनुस जैसे प्रभावशाली व्यक्तित्व की मध्यस्थता या सहयोग से सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर दोनों देशों में समझ और साझेदारी बढ़ सकती है।

क्या उम्मीद की जा सकती है?

1. साझा परियोजनाएं – ग्रामीण बैंक मॉडल को भारत के ग्रामीण इलाकों में अपनाने की दिशा में सहयोग संभव है।

2. शैक्षिक और सामाजिक क्षेत्र में सहयोग – दोनों देशों के विश्वविद्यालय और संस्थान मिलकर रिसर्च और ट्रेनिंग प्रोग्राम चला सकते हैं।

3. राजनीतिक संवाद का नया रास्ता – इस मुलाकात को बांग्लादेश की सरकार और भारत के बीच संवाद की एक अनौपचारिक लेकिन मजबूत शुरुआत माना जा सकता है।

निष्कर्ष

बैंकॉक में हुई यह मुलाकात प्रतीकात्मक होने के बावजूद गहरे कूटनीतिक संदेश लिए हुए है। मोहम्मद यूनुस जैसे वैश्विक व्यक्तित्व की उपस्थिति भारत-बांग्लादेश के बीच भरोसे की नई जमीन तैयार कर सकती है। आने वाले समय में अगर इस संवाद को सही दिशा दी जाती है, तो यह न केवल दोनों देशों के रिश्तों को मजबूती देगा, बल्कि दक्षिण एशिया में स्थिरता और विकास का मार्ग भी प्रशस्त कर सकता है।

Divya Gupta

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