UGC विधेयक पर नोएडा के भाजपा नेता अनिल पंडित की चेतावनी, बोले—“यह विधेयक न दलित हित में है, न सामाजिक समरसता के अनुकूल”

नोएडा: UGC इक्विटी विधेयक को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर लगातार मुखर होते जा रहे हैं। राजू पंडित के बाद अब भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व जिला उपाध्यक्ष अनिल पंडित ने इस विधेयक को लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को गंभीर चेतावनी दी है।
अनिल पंडित ने जारी अपने बयान में कहा कि, “जिस उद्देश्य को लेकर UGC इक्विटी विधेयक लाया गया है, उससे दलित या पिछड़े समाज का कोई ठोस अथवा दूरगामी लाभ होता हुआ प्रतीत नहीं होता। इसके विपरीत, इस विधेयक से सवर्ण समाज की भावनाएँ आहत हुई हैं, जो सामाजिक समरसता के लिए घातक हो सकता है।”
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्षों के सामाजिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ ने छुआछूत और भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किया है। “आज की परिस्थितियों में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं कि सामाजिक भेदभाव लगभग समाप्ति की अवस्था में है। ऐसे समय में इस प्रकार के विधेयक समाज को पीछे ले जाने का कार्य कर सकते हैं,” उन्होंने कहा।
अनिल पंडित ने आशंका जताई कि यदि यह विधेयक वर्तमान स्वरूप में लागू होता है, तो भय और भ्रम के वातावरण के कारण समाज के विभिन्न वर्गों के बीच दूरी बढ़ सकती है। “जिस सामाजिक सौहार्द को संघ और भाजपा ने वर्षों की साधना से मजबूत किया है, उसे ठेस पहुँचने की पूरी संभावना है,” उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह विधेयक न तो दलित समाज को कोई वास्तविक सुख-सुविधा देता है और न ही कोई नया अधिकार सुनिश्चित करता है, बल्कि इससे केवल मानसिक तनाव और वैचारिक टकराव की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
अपने बयान के अंत में अनिल पंडित ने पार्टी नेतृत्व से विनम्र लेकिन दृढ़ अपील करते हुए कहा, “भाजपा को शीर्ष पर पहुँचाने वाला वर्ग आज स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहा है। यह दुःखद है। अतः इस विधेयक पर गंभीरता से पुनर्विचार करते हुए इसे वापस लेने की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।”




