Noida: पंचकुला से आए दिल से पश्चिमी यूपी में पहला सफल हुआ हार्ट ट्रांसप्लांट, 56 वर्षीय के व्यक्ति को मिला जीवनदान
पंचकुला से मिले डोनर हार्ट को पुलिस प्रशासन की मदद से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर रिकॉर्ड समय में नोएडा अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने सफल सर्जरी को अंजाम दिया।

नोएडा के फोर्टिस अस्पताल ने चिकित्सा जगत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और नोएडा क्षेत्र का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट कर 56 वर्षीय मरीज को जीवनदान दिया है। मरीज क्रोनिक हार्ट फेलियर से जूझ रहे थे और उनके दिल की कार्यक्षमता गिरकर बेहद कम रह गई थी।
पंचकुला से मिले डोनर हार्ट को पुलिस प्रशासन की मदद से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर रिकॉर्ड समय में नोएडा अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने सफल सर्जरी को अंजाम दिया। 56 वर्षीय तपस कुमार डे अप्रैल महीने में कश्मीर यात्रा के दौरान अचानक दिल का गंभीर दौरा पड़ा। दिल्ली-एनसीआर के कई अस्पतालों में इलाज के बाद वह 17 जुलाई को फोर्टिस अस्पताल नोएडा पहुंचे। डॉक्टरों की जांच में सामने आया कि उनका दिल सिर्फ 20 से 25 प्रतिशत ही काम कर पा रहा था और दवाइयों से उनकी हालत में सुधार नहीं हो रहा था।
कई टेस्ट के बाद डॉक्टरों ने बताया कि दिल लंबे समय तक साथ नहीं दे सकता और हार्ट ट्रांसप्लांट ही एकमात्र रास्ता है। मरीज की बिगड़ती स्थिति के बीच पंचकुला में एक डोनर हार्ट उपलब्ध हुआ। डोनर हार्ट को 2 से 3 घंटे के भीतर मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित करना सबसे बड़ी चुनौती थी। इसके लिए नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO), हरियाणा और उत्तर प्रदेश पुलिस तथा एयरपोर्ट प्रशासन ने बेहतरीन तालमेल दिखाया। डोनर हार्ट को एयरलिफ्ट कर गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरपोर्ट लाया गया, जहां से 20 किलोमीटर की दूरी महज 16 मिनट में ग्रीन कॉरिडोर के जरिए तय कर फोर्टिस नोएडा पहुंचाया गया।
फोर्टिस अस्पताल के डॉ. अजय कौल ने बताया कि मेडिकल टीम ने एक घंटे के भीतर सफल सर्जरी कर डोनर हार्ट को मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित कर दिया। सफल ट्रांसप्लांट के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार देखा गया और परिवार ने डोनर परिवार एवं डॉक्टरों का आभार जताया है। यह सफल हृदय प्रत्यारोपण न केवल फोर्टिस अस्पताल बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ है, जिसने अंगदान और समय पर चिकित्सा सुविधाओं के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया है।




