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ग्रेटर नोएडानोएडा

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में भवन नियमों में बड़ा बदलाव, अब पहले से कई गुना ऊंची इमारतें बनाने की मिलेगी अनुमति

नई भवन विनियमावली से बदलेगा नोएडा-ग्रेटर नोएडा का भविष्य

नोएडा: दिल्ली-एनसीआर का सबसे तेजी से विकसित होता क्षेत्र, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे, अब एक नए बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। यहां पहली बार एकीकृत भवन विनियमावली (Building Bye-laws) लागू की जा रही है, जिसमें सबसे बड़ा सुधार है – प्रीमियम परचेजेबल एफएआर (Floor Area Ratio)।

यह बदलाव न केवल शहर की स्काईलाइन को नया रूप देगा, बल्कि रियल एस्टेट निवेशकों, डेवलपर्स और आम नागरिकों के लिए भी नए अवसर लेकर आएगा।

क्या है एफएआर और प्रीमियम परचेजेबल एफएआर?

एफएआर (FAR) का मतलब होता है फ्लोर एरिया रेशियो। यह तय करता है कि किसी प्लॉट पर कितनी मंजिलें और कितना निर्माण किया जा सकता है।

अब तक डेवलपर्स केवल बेसिक एफएआर का ही उपयोग कर पाते थे, लेकिन नई विनियमावली के तहत उन्हें प्रीमियम दर पर अतिरिक्त एफएआर खरीदने की सुविधा मिलेगी। इसका मतलब है कि अब वे जमीन का उपयोग पहले से दो से तीन गुना तक अधिक कर पाएंगे और गगनचुंबी इमारतें खड़ी कर सकेंगे।


नई व्यवस्था से क्या होंगे बदलाव?

  1. ऊंची इमारतों की इजाजत: मौजूदा टावरों से दो से पांच गुना ऊंचे प्रोजेक्ट संभव होंगे।
  2. जमीन का बेहतर उपयोग: सीमित भूमि पर ज्यादा फ्लोर और यूनिट्स बनाए जा सकेंगे।
  3. निवेशकों के लिए आकर्षण: नोएडा-ग्रेटर नोएडा अब हाईराइज टावरों का केंद्र बनेगा।
  4. पुराने प्लॉट धारकों को राहत: पुराने आवंटन वाले भी अतिरिक्त ग्राउंड कवरेज का लाभ उठा सकेंगे।
  5. शहर की स्काईलाइन बदलेगी: आने वाले समय में यह क्षेत्र देश के सबसे ऊंचे टावरों का गवाह बनेगा।

रियल एस्टेट सेक्टर पर असर

नई भवन विनियमावली का सीधा असर रियल एस्टेट सेक्टर पर होगा।

  • डेवलपर्स को फायदा: अतिरिक्त एफएआर खरीदकर वे बड़े-बड़े प्रोजेक्ट लॉन्च कर पाएंगे।
  • खरीदारों के लिए विकल्प: ज्यादा यूनिट्स आने से घरों और ऑफिस की उपलब्धता बढ़ेगी।
  • निवेश को बढ़ावा: विदेशी और घरेलू निवेशक ऊंची इमारतों वाले प्रोजेक्ट्स में अधिक रुचि दिखाएंगे।
  • प्राधिकरण को राजस्व: एफएआर बिक्री से विकास प्राधिकरण को बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा।

आगे की प्रक्रिया

22 सितंबर को अधिकारियों की बैठक में इस मसौदे पर चर्चा होगी। इसके बाद आम जनता और हितधारकों से सुझाव व आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। अंतिम रूप से बोर्ड की मंजूरी और शासन की स्वीकृति के बाद इसका गजट नोटिफिकेशन जारी होगा। इसके बाद गाइडलाइंस तैयार कर इसे लागू किया जाएगा।

क्यों है यह बदलाव खास?

  • नोएडा-ग्रेटर नोएडा भवन नियम बदलाव से यह क्षेत्र ग्लोबल हाईराइज शहरों की सूची में शामिल होगा।
  • यहां गगनचुंबी इमारतों का निर्माण न सिर्फ शहर को आधुनिक बनाएगा बल्कि रोजगार और निवेश के नए अवसर भी खोलेगा।
  • सीमित भूमि संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा सकेगा।
  • इससे नोएडा-ग्रेटर नोएडा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रियल एस्टेट हब के रूप में नई पहचान मिलेगी।

कुल मिलाकर, नई भवन विनियमावली और प्रीमियम परचेजेबल एफएआर से आने वाले वर्षों में नोएडा-ग्रेटर नोएडा की स्काईलाइन पूरी तरह बदल जाएगी और यह क्षेत्र भारत के सबसे ऊंचे टावरों का घर बनेगा।

Vishnu Pratap

मेरा नाम विष्णु प्रताप है। मेरा जन्म 18 मई 2004 को उत्तर प्रदेश के एटा जिले में हुआ। पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक करियर नहीं, बल्कि एक जुनून है। वर्तमान में मैं Federal Bharat News में रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हूं। मुझे अंतरराष्ट्रीय संबंध, इतिहास, राजनीति, युद्ध से जुड़ी खबरें, बिज़नेस और NGO से संबंधित विषयों में गहरी रुचि है। खाली समय में मुझे पढ़ना और अपने दोस्तों के साथ समय बिताना अच्छा लगता है।

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मेरा नाम विष्णु प्रताप है। मेरा जन्म 18 मई 2004 को उत्तर प्रदेश के एटा जिले में हुआ। पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक करियर नहीं, बल्कि एक जुनून है। वर्तमान में मैं Federal Bharat News में रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हूं। मुझे अंतरराष्ट्रीय संबंध, इतिहास, राजनीति, युद्ध से जुड़ी खबरें, बिज़नेस और NGO से संबंधित विषयों में गहरी रुचि है। खाली समय में मुझे पढ़ना और अपने दोस्तों के साथ समय बिताना अच्छा लगता है।

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