Noida: गौतमबुद्ध नगर में वैश्य समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर उठे सवाल, महत्वपूर्ण पदों में हिस्सेदारी की मांग
वैश्य समाज को भी उचित भागीदारी देने की उठी आवाज

गौतमबुद्ध नगर में भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में वैश्य समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि जिले में पार्टी के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कई समाजों के प्रतिनिधियों को जिम्मेदारी मिली हुई है, लेकिन वैश्य समाज को भी उसी अनुपात में प्रतिनिधित्व और महत्वपूर्ण पदों पर अवसर मिलना चाहिए।
इस संबंध में भाजपा के जिला, महानगर, मंडल और विभिन्न मोर्चों में पदाधिकारियों की एक सूची सामने रखी गई है। इसमें सांसद डॉ. महेश शर्मा से लेकर दादरी की चेयरमैन गीता पंडित समेत कई नेताओं और पदाधिकारियों के नाम शामिल हैं। इसके अलावा युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, किसान मोर्चा और विभिन्न मंडलों में भी अनेक पदाधिकारियों के नाम गिनाए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय वैश्य संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय अग्रवाल ने कहा कि सवाल किसी समाज का विरोध नहीं, बराबरी के अवसर का है
वैश्य समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी अन्य समाज के प्रतिनिधित्व पर सवाल खड़ा करना या किसी समाज का विरोध करना नहीं है। उनकी मांग है कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में वैश्य समाज की भागीदारी भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे और समाज के योग्य, सक्रिय तथा समर्पित कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाएं।
समाज के लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि एक जिले में किसी समाज के अनेक लोगों को अलग-अलग स्तरों पर संगठन में जिम्मेदारी मिल सकती है, तो वैश्य समाज को महत्वपूर्ण पदों पर पर्याप्त प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिल रहा है?
पार्टी नेतृत्व से पुनर्विचार की अपेक्षा
वैश्य समाज की अपेक्षा है कि भाजपा का जिला और प्रदेश नेतृत्व संगठन में सामाजिक भागीदारी की समीक्षा करे। जिला, महानगर, मंडल और विभिन्न मोर्चों में पदों के वितरण के दौरान वैश्य समाज के योग्य कार्यकर्ताओं को भी उचित अवसर दिया जाए।
समाज के प्रतिनिधियों का मानना है कि संगठन की मजबूती सभी वर्गों की भागीदारी से बढ़ती है। ऐसे में वैश्य समाज को भी राजनीतिक और संगठनात्मक जिम्मेदारियों में सम्मानजनक स्थान मिलना चाहिए, ताकि पार्टी के प्रति उसकी सक्रियता और योगदान को उचित पहचान मिल सके।




