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उत्तर भारत की सबसे बड़ी कंपनी बिकी, जेपी एसोसिएट भी गई अडानी के कब्जे में….

रियल एस्टेट, सीमेंट, पावर, होटल्स और सड़कों को लेकर काम करने वाली JP एसोसिएट लोन की पेमेंट नहीं कर पाने के चलते दिवालाया प्रक्रिया में चली गई थी।

JP ग्रुप की कंपनियों पर कुल 57 हजार करोड़ का कर्ज था। अडानी ने सिर्फ 14,500 करोड़ रुपये दिए ओर जेपी समूह के उन 7 उद्योगों के कारोबार पर नियंत्रण हासिल कर लिया। जिन्होंने वित्त वर्ष 2025 में 6,500 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व और 35,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति दर्ज की है।

इसे कहते है हींग लगे न फिटकरी और रंग चोखा
रियल एस्टेट, सीमेंट, पावर, होटल्स और सड़कों को लेकर काम करने वाली JP एसोसिएट लोन की पेमेंट नहीं कर पाने के चलते दिवालाया प्रक्रिया में चली गई थी। कंपनी को कर्ज देने वाले लेंडर्स ने आईबीसी (इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड) के तहत इसकी बिक्री के लिए नीलामी की प्रक्रिया शुरू की थी।

जेपी एसोसिएट्स की संपत्तियां जेपी एसोसिएट्स के पास नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जेपी ग्रीन्स विशटाउन, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास जेपी इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी, दिल्ली-एनसीआर में इसके तीन कॉमर्शियल/इंडस्ट्रियल ऑफिस दिल्ली-एनसीआर, मसूरी और आगरा में पांच होटल, मध्‍यप्रदेश और और यूपी में चार सीमेंट प्लांट्स और एमपी में लीज पर लिए हुए कुछ लाइमस्टोन माइन्स हैं. हालांकि सीमेंट प्लांट अभी चल नहीं रहे हैं। इन सबके अलावा जयप्रकाश एसोसिएट्स का सब्सिडरीज- जयप्रकाश पावर वेंचर्स, यमुना एक्सप्रेसवे टोलिंग, जयपी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट समेत कुछ और कंपनियों में निवेश भी है।

अडानी एंटरप्राइजेज के साथ-साथ अनिल अग्रवाल की वेदांता ने भी जेपी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए बोली लगाई थी। वेदांता की बोली अडानी से बड़ी थी लेकिन सूत्रों के मुताबिक बेहतर प्रीपेमेंट टर्म्स के कारण क्रेडिटर्स ने अडानी की बोली को मंजूरी दे दी। वेदांता लिमिटेड ने 3,800 करोड़ रुपये एडवांस और पांच सालों में कुल 12,400 करोड़ रुपए देने की पेशकश की थी। इससे उसकी टोटल वैल्यू 16,726 करोड़ रुपये रही।

लेनदार बैंकों ने अदाणी ग्रुप को बाकी दावेदारों से ज्यादा एडवांस पेमेंट देने के चलते चुना। मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, अदाणी ने कुल 14,500 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया, लेकिन इसमें 6,000 करोड़ रुपये अपफ्रंट और बाकी 7600 करोड़ रुपये दो साल बाद देने को कहा, जो लेंडर्स की रिकवरी के लिहाज से काफी आकर्षक माना गया तो डील अडानी को दे दी गई। यानी सब कुछ लीगल तरीके से हुआ है।

Aashish Gupta

आशीष गुप्ता ने जागरण इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया है और राजनीतिक विज्ञान में MA करने के बाद वह राष्ट्रीय सहारा, दैनिक जागरण जैसे देश के प्रमुख समाचार संस्थानों में कार्यरत रहे। 2015 में पीआर कंपनी मेक यू बिग मीडिया प्राइवेट की स्थापना करने के बाद 2021 में फ़ेडरल भारत की शुरुआत की।

Aashish Gupta

आशीष गुप्ता ने जागरण इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया है और राजनीतिक विज्ञान में MA करने के बाद वह राष्ट्रीय सहारा, दैनिक जागरण जैसे देश के प्रमुख समाचार संस्थानों में कार्यरत रहे। 2015 में पीआर कंपनी मेक यू बिग मीडिया प्राइवेट की स्थापना करने के बाद 2021 में फ़ेडरल भारत की शुरुआत की।

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