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वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, केंद्र को नोटिस जारी, संवैधानिक वैधता पर सवाल

नोएडा: वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने इस संशोधित कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

साथ ही इस याचिका को 1995 के वक्फ अधिनियम को चुनौती देने वाली पहले से लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया गया है।

सीजेआई ने उठाए देरी पर सवाल

मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अनुपस्थिति में सुनवाई कर रही खंडपीठ, जिसमें सीजेआई बी. आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह शामिल थे, ने याचिकाकर्ता के वकील अश्विनी उपाध्याय से यह सवाल किया कि इतने वर्षों बाद आखिर अब वक्फ अधिनियम को क्यों चुनौती दी जा रही है।

जब वकील ने कहा कि 2013 के संशोधन को भी चुनौती दी गई है, तो कोर्ट ने कहा कि वह भी अब 12 साल पुराना है और देरी की वजह से याचिका खारिज की जा सकती है।

याचिकाकर्ता की दलील: वक्फ अधिनियम असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण

याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि वक्फ अधिनियम 1995 और उसके 2025 संशोधन में कई धाराएं संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 15 (भेदभाव निषेध), 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता), 25-27 (धार्मिक स्वतंत्रता) का उल्लंघन करती हैं।

इसके साथ ही यह तर्क भी दिया गया कि सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लिए ही धार्मिक संपत्तियों के संरक्षण और प्रबंधन से संबंधित विशेष कानून है, जबकि हिंदू, सिख, ईसाई या अन्य समुदायों के लिए ऐसा कोई कानून नहीं है। इसी आधार पर अधिनियम को भेदभावपूर्ण और संविधान विरोधी बताया गया।

पहले से लंबित याचिकाओं से जोड़ा मामला

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट पहले से ही पूजा स्थल अधिनियम 1991 और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1992 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। ऐसे में वक्फ अधिनियम से जुड़ी नई याचिका को भी इन्हीं मामलों के साथ जोड़ा गया है ताकि समग्र रूप से विचार किया जा सके।

निष्कर्ष:

अब सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर विस्तृत सुनवाई होगी, जिसमें तय होगा कि क्या वक्फ अधिनियम के प्रावधान वास्तव में संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं।

यह मामला धार्मिक अधिकारों और संवैधानिक समानता जैसे महत्वपूर्ण सवालों को उठाता है, जिसकी कानूनी परिणति दूरगामी प्रभाव डाल सकती है।

 

Divya Gupta

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