भक्ति की भाव-गंगा में भीगा संभल — कल्कि धाम में गुरु माँ संतोष साध्वी के भजनों ने बांधा आध्यात्मिक समां

संभल : संभल स्थित कल्कि धाम में आयोजित भव्य शिलादान महोत्सव में भक्ति, श्रद्धा और अध्यात्म की त्रिवेणी प्रवाहित होती दिखाई दी। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और गुरु परंपरा की गौरवशाली झलक भी बना।
कार्यक्रम की विशेष आकर्षण रहीं गुरु माँ संतोष साध्वी, जिनकी दिव्य भजन संध्या ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। जैसे ही उन्होंने मंच से स्वर-साधना आरंभ की, सम्पूर्ण वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया। उनके भजनों में सुर, लय और भक्ति का ऐसा संगम था, जिसने हर हृदय को गहराई से स्पर्श किया।
‘राम नाम की महिमा’, ‘कृपा करो नंदलाल’ जैसे भजनों की प्रस्तुति ने श्रोताओं को झूमने और कई आंखों को नम करने पर विवश कर दिया। गुरु माँ संतोष साध्वी वर्षों से भक्ति संगीत को साधना का माध्यम बनाकर समाज को अध्यात्म से जोड़ने का कार्य कर रही हैं। उनका गायन केवल मनोरंजन नहीं, आत्मा और परमात्मा के बीच सेतु का कार्य करता है।
इस अवसर पर सुप्रसिद्ध संत आचार्य प्रमोद कृष्णम ने मंच से गुरु माँ की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा, “संतोष साध्वी जी का गायन केवल सुर नहीं, आत्मा की पुकार है। उन्होंने आज साक्षात भक्ति की अनुभूति कराई है।”
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक, अनेक संत-महात्मा, धर्माचार्य और समाजसेवी भी उपस्थित रहे। सभी ने इस आयोजन को एक नए आध्यात्मिक जागरण की शुरुआत बताया और कल्कि धाम को भविष्य का एक प्रमुख धर्मस्थल बनने की शुभकामनाएँ दीं।
गुरु माँ संतोष साध्वी की संगीतमयी साधना ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब मंदिर परिसर में भक्ति का स्वर गूंजता है, तो वह केवल कानों को नहीं, आत्मा को भी छू जाता है। शिलादान महोत्सव की यह पावन संध्या श्रद्धालुओं के हृदय में लंबे समय तक गूंजती रहेगी।




