नोएडा अथॉरिटी में भ्रष्टाचार और सांठगांठ की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला – नई तीन सदस्यीय SIT गठित

नोएडा: सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों और बिल्डरों के बीच कथित भ्रष्टाचार और मिलीभगत के गंभीर आरोपों की जांच के लिए नई तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) के गठन का आदेश दिया है। यह ऐतिहासिक फैसला बुधवार को जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की खंडपीठ ने सुनाया।
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि नोएडा अथॉरिटी को महानगर परिषद में बदलने पर गंभीरता से विचार किया जाए, ताकि भविष्य में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
यह है मामला
सुनवाई के दौरान यह मामला एक पूर्व कानूनी अधिकारी द्वारा 7.28 करोड़ रुपये के अनुचित मुआवजे की मंजूरी से जुड़ा था। इससे पहले गठित SIT की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि नोएडा अथॉरिटी और बिल्डरों की मिलीभगत से किसानों को 20 मामलों में 117 करोड़ रुपये का अत्यधिक मुआवजा दिया गया, जिनमें कई लाभार्थी इसके हकदार नहीं थे।
रिपोर्ट ने यह भी दर्शाया कि नोएडा अथॉरिटी की निर्णय प्रक्रिया अपारदर्शी है और यह बिल्डरों के पक्ष में कार्य करती है। साथ ही अधिकारियों, उनके परिजनों और लाभार्थियों के बीच संभावित सांठगांठ की गहन जांच की आवश्यकता बताई गई।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश:
- नई SIT का गठन
- उत्तर प्रदेश के डीजीपी तीन वरिष्ठ IPS अधिकारियों की नई SIT गठित करेंगे।
- इसमें फॉरेंसिक विशेषज्ञ और आर्थिक अपराध शाखा (EoW) के अधिकारी शामिल होंगे।
- SIT तत्काल प्रारंभिक जांच शुरू करेगी और अपराध पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई करेगी।
- पारदर्शिता और निगरानी के उपाय
- SIT की रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को सौंपी जाएगी, जिसे मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
- नोएडा में मुख्य सतर्कता अधिकारी (IPS कैडर या CAG से डेप्युटेशन पर) नियुक्त होगा।
- चार सप्ताह के भीतर नागरिक सलाहकार बोर्ड गठित होगा।
- पर्यावरणीय मंजूरी अनिवार्य की
- नोएडा में कोई भी नया प्रोजेक्ट तभी शुरू होगा, जब उसे पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन (EIA) और सुप्रीम कोर्ट की ग्रीन बेंच से मंजूरी मिल जाएगी।
- मुआवजे की गहन जांच का आदेश
- SIT जांच करेगी कि मुआवजा कोर्ट आदेशों से अधिक था या नहीं, कौन से अधिकारी जिम्मेदार थे, और क्या कोई सांठगांठ थी।
- किसानों की सुरक्षा के आदेश
- जिन किसानों को मुआवजा मिला है, उनके खिलाफ बिना कोर्ट की अनुमति कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।
- तेज़ कार्रवाई के लिए तय की समय सीमा
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दो सप्ताह के भीतर दी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को नोएडा में प्रशासनिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे न केवल विकास परियोजनाओं में जवाबदेही बढ़ेगी बल्कि किसानों और आम जनता के हित भी सुरक्षित होंगे।



