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निठारी कांड: कानूनी लड़ाई का अंत, लेकिन न्याय की तलाश अब भी अधूरी ! 

नोएडा : करीब दो दशकों तक चले निठारी कांड से जुड़े मुकदमे में अब कानूनी लड़ाई लगभग समाप्ति पर है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले में मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को बड़ी राहत मिली और उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।

लेकिन इस फैसले के बाद एक गूंजता हुआ सवाल अब भी लोगों के ज़हन में है—आख़िर उन 19 मासूमों का असली गुनहगार कौन था जिनके कंकाल 2006 में निठारी के नाले से मिले थे?

देश को झकझोर देने वाला जघन्य हत्याकांड

2006 में सामने आए निठारी कांड ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। इस मामले में न सिर्फ बच्चों के सिलसिलेवार अपहरण और हत्या की बात सामने आई थी, बल्कि यौन शोषण और यहां तक कि नरभक्षण जैसे भयानक आरोप भी लगे थे। जिसने भी इस हत्याकांड की सच्चाई सुनी, वह कांप उठा।

इलाहाबाद हाईकोर्ट से भी मिल चुकी थी राहत

इस घटना के बाद मोनिंदर सिंह पंढेर और उनके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार कर सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया गया था, जहां उन्हें दोषी ठहराया गया। लेकिन 17 अक्टूबर 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों को बरी कर दिया और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी यही फैसला बरकरार रखा है

जांच एजेंसियों की भूमिका पर उठे सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर ये दोनों निर्दोष हैं तो फिर असली अपराधी कौन है? पुलिस और सीबीआई जैसी एजेंसियां जो सूई तक ढूंढ लाने का दावा करती हैं, वे इतने बड़े मामले में असली गुनहगारों तक क्यों नहीं पहुंच सकीं? क्या जांच में कहीं लापरवाही हुई? क्या साक्ष्य के साथ खिलवाड़ किया गया?

पीड़ितों की पीड़ा और न्याय की अधूरी उम्मीद

जिन परिवारों ने अपने मासूम बच्चों को खोया, वे आज भी न्याय के इंतजार में हैं। फैसले को वे मजबूरी में स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन उनके मन में अब भी यह कसक है कि उनकी संतानों को मारने वाला दरिंदा खुलेआम घूम रहा है।

खुद पीड़िता ज्योति के पिता झब्बू लाल ने जांच एजेंसियों पर सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि पूरी जांच प्रक्रिया पर पुनर्विचार होना चाहिए।

क्या कभी मिलेगा न्याय?

19 बच्चों के खून से सना यह मामला अब भी न्याय की प्रतीक्षा में है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला भले अंतिम हो, लेकिन सामाजिक और नैतिक तौर पर इस केस की गूंज अभी थमी नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या कभी पीड़ित परिवारों को वह सच्चा न्याय मिल पाएगा, जिसकी उन्हें सालों से उम्मीद है?

 

 

Divya Gupta

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