विश्व स्ट्रोक दिवस: कम उम्र में बढ़ रही युवाओं स्ट्रोक की समस्या, पैरेंट्स का ब्लड गाढ़ा है तो कराएं बच्चों की नियमित जांच
बीते 15 से 20 साल में बुजुर्ग के मुकाबले युवाओं में अधिक खतरा बढ़ा है। साथ ही, स्ट्रोक के बाद की रिहैबिलिटेशन को लेकर मरीजों और उनके परिवारों में पर्याप्त जानकारी की कमी है।

भारत में तेजी के साथ युवाओं में ब्रेन स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे है। देश में हर 20 सेकंड में एक व्यक्ति को ब्रेन स्ट्रोक का शिकार हो रहा है। हर साल लगभग 18 लाख नए मामले सामने आते हैं। स्ट्रोक देश में मृत्यु और विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है, लेकिन लोगों में इसकी रोकथाम और समय पर इलाज को लेकर जागरूकता अब भी कम है।
बीते 15 से 20 साल में बुजुर्ग के मुकाबले युवाओं में अधिक खतरा बढ़ा है। साथ ही, स्ट्रोक के बाद की रिहैबिलिटेशन को लेकर मरीजों और उनके परिवारों में पर्याप्त जानकारी की कमी है। शारदा केयर हेल्थसिटी के डॉ. आतमप्रीत सिंह ने बताया कि इस बीमारी के मुख्य कारण बैठे रहने की आदत, मोटापा, गलत खानपान, धूम्रपान और शराब का सेवन आदि होते है। युवा पीढ़ी में यह बीमारी जेनेटिक हो सकती है। अगर किसी के परिजनों का खून गाढ़ा होता है तो युवाओं में भी स्ट्रोक का एक मुख्य कारण हो सकता है। ऐसे में समय रहते ही बच्चों के खून की नियमित जांच कराती रहनी चाहिए।
डॉ. आतमप्रीत सिंह ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक का इलाज 4.5 घंटे के अंदर मरीज को मिल जाए तो परिणाम काफी बेहतर होते हैं। शुरूआत में आंखों से देखने में दिक्कत, चेहरे का टेढ़ा होना, हाथ-पैर में कमजोरी और बोलने में परेशानी होती है। किसी में यह लक्षण सामने आते है तो उन्हें समय रहते डॉक्टरों की सलाह जरुर लेनी चाहिए। नॉलेज पार्क स्थित शारदाकेयर हेल्थसिटी ने स्ट्रोक मरीजों के लिए स्ट्रोक क्लिनिक और कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रोक रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम की शुरुआत की गई।
इस अवसर पर एक जागरूकता सेमिनार का भी आयोजन किया गया, जिसमें शहर भर के 25 से अधिक डॉक्टरों ने भाग लिया। इस सेमिनार में स्ट्रोक की पहचान, रोकथाम, इलाज और इलाज के बाद की देखभाल पर चर्चा की गई।



