अंतरराष्ट्रीय वैश्य संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय अग्रवाल का बड़ा बयान, मंत्रिमंडल विस्तार में वैश्य समाज को स्थान न मिलने पर जताई नाराजगी

नोएडा – अंतरराष्ट्रीय वैश्य संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विनय कुमार अग्रवाल ने वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में वैश्य समाज की उपेक्षा पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज प्रदेश की राजनीति में लगभग हर समाज का प्रतिनिधित्व दिखाई देता है, लेकिन वैश्य समाज आज भी अपनी जनसंख्या, व्यापारिक योगदान और सामाजिक प्रभाव के अनुपात में राजनीतिक हिस्सेदारी से बहुत पीछे खड़ा है।
उन्होंने कहा कि वैश्य समाज देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यह समाज सबसे अधिक व्यापार करता है, करोड़ों लोगों को रोजगार देता है, सबसे अधिक टैक्स जमा करता है और हर संकट में राष्ट्र निर्माण में अपनी अग्रणी भूमिका निभाता है। इसके बावजूद राजनीतिक प्रतिनिधित्व में समाज की अनदेखी लगातार चिंता का विषय बनी हुई है।
“जो अर्थव्यवस्था संभालता है, उसकी राजनीति में भी भागीदारी जरूरी”
श्री अग्रवाल ने कहा कि जिस समाज के कंधों पर देश की आर्थिक व्यवस्था टिकी हो, उसकी सत्ता और नीति निर्माण में भी मजबूत भागीदारी होनी चाहिए। लेकिन वर्षों से वैश्य समाज केवल समर्थन देने और चुनावों में मजबूती से वोट करने तक सीमित रह गया है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वैश्य समाज हमेशा भारतीय जनता पार्टी का सबसे मजबूत और समर्पित वोटर रहा है, लेकिन हर चुनाव में टिकट वितरण, मंत्री पदों और संगठनात्मक नियुक्तियों में समाज को अपेक्षित सम्मान और प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
संगठन और एकता ही राजनीतिक ताकत की कुंजी
विनय कुमार अग्रवाल ने कहा कि अब समय केवल समर्थन देने का नहीं, बल्कि संगठन, एकता और अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी तय करने का है। उन्होंने कहा, “जो समाज जितना संगठित होगा, सत्ता में उसकी आवाज उतनी ही मजबूत होगी।”
उन्होंने समाज के युवाओं, व्यापारियों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों से एकजुट होकर राजनीतिक चेतना बढ़ाने का आह्वान किया।
वैश्य समाज को उसका अधिकार मिलना चाहिए
उन्होंने कहा कि वैश्य समाज किसी पर कृपा नहीं मांग रहा, बल्कि अपने योगदान और संख्या के अनुसार सम्मानजनक भागीदारी चाहता है। लोकतंत्र में हर समाज की हिस्सेदारी उसके योगदान, जनसंख्या और संगठन क्षमता के आधार पर तय होती है।
अब उपेक्षा स्वीकार नहीं
अंतरराष्ट्रीय वैश्य संगठन के अध्यक्ष ने कहा कि आने वाले समय में समाज अपने राजनीतिक अधिकारों और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाएगा।
उन्होंने कहा, “सियासत का नियम साफ है — जो समाज अपनी हिस्सेदारी नहीं मांगता, सत्ता उसे सिर्फ वोट बैंक समझती है।”
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से वैश्य समाज की उपेक्षा बंद कर उसे विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा, राज्यसभा तथा संगठनात्मक पदों पर उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग की।



