नोएडा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समर्थन में निकाले गए मार्च का एडवोकेट गौरव सिंघल ने किया विरोध

नोएडा। समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एवं वैश्य समाज के प्रतिनिधि एडवोकेट गौरव सिंघल ने नोएडा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समर्थन में निकाले गए पैदल मार्च पर कड़ा असहमति व्यक्त करते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता और स्वतंत्रता लोकतंत्र की बुनियाद है। उनका कहना है कि सामाजिक एवं व्यापारिक संस्थाओं को किसी संवैधानिक पदाधिकारी के समर्थन या विरोध में राजनीतिक स्वरूप वाले प्रदर्शन से दूरी बनाए रखनी चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से अग्रवाल मित्र मंडल सहित सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि वैश्य समाज की प्रतिष्ठित संस्थाओं की पहचान समाजसेवा, सामाजिक समरसता और जनकल्याण से रही है। ऐसी संस्थाओं को किसी राजनीतिक विवाद का हिस्सा बनने से बचना चाहिए।
एडवोकेट गौरव सिंघल ने कहा, “मेरा विरोध वैश्य समाज से नहीं है और न ही किसी व्यक्ति विशेष से है। मुझे अपने समाज की गौरवशाली परंपरा और सामाजिक योगदान पर गर्व है। मेरा सवाल केवल इतना है कि क्या सामाजिक संस्थाओं को किसी संवैधानिक पदाधिकारी के समर्थन में सड़क पर उतरकर राजनीतिक संदेश देना उचित है? मेरे विचार से सामाजिक संस्थाओं को अपनी गैर-राजनीतिक पहचान और सामाजिक गरिमा बनाए रखनी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त का पद देश के लोकतांत्रिक और संवैधानिक ढांचे में अत्यंत महत्वपूर्ण है। निर्वाचन आयोग चुनाव प्रक्रिया के संचालन के लिए एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था है। ऐसे में किसी व्यक्ति विशेष के समर्थन में सामाजिक संस्थाओं द्वारा सार्वजनिक प्रदर्शन किए जाने से संस्था की निष्पक्षता को लेकर आम जनता के बीच अनावश्यक बहस और सवाल पैदा हो सकते हैं।
गौरव सिंघल ने कहा कि समाजवादी पार्टी लगातार निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय चुनाव प्रक्रिया की मांग करती रही है। वर्तमान समय में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देश में राजनीतिक दलों के बीच मतभेद और विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। ऐसे माहौल में सामाजिक संस्थाओं को किसी एक पक्ष के समर्थन में अपनी संस्थागत पहचान का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में हर व्यक्ति और संगठन को अपनी बात रखने का अधिकार है। लेकिन सामाजिक संस्थाओं की जिम्मेदारी और भी बड़ी है। उन्हें समाज को जोड़ने का कार्य करना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक विवाद में पक्षकार बनना चाहिए।”
एडवोकेट गौरव सिंघल ने अग्रवाल मित्र मंडल के पदाधिकारियों तथा वैश्य समाज के प्रबुद्धजनों से अपील करते हुए कहा कि सामाजिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा उनके गैर-राजनीतिक चरित्र और समाजसेवा से बनती है। इसलिए भविष्य में ऐसी गतिविधियों से बचना चाहिए, जिनसे समाज या संस्था की राजनीतिक पहचान बनने की धारणा पैदा हो।
उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता की रक्षा किसी एक दल या विचारधारा का विषय नहीं, बल्कि लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।



