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Noida: सुरेंद्र कोली की मौत पर उठे साल, आत्महत्या पर बोले पीड़ित की गई हत्या, अब PM रिपोर्ट पर नजर

सुरेंद्र कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था। रिहाई के बाद उसने सप्तऋषि क्षेत्र में छोटी सी चाय की दुकान शुरू की थी। बताया जा रहा है कि इसी दुकान पर वह रहता और काम करता था।

करीब दो दशक तक देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहे नोएडा के निठारी कांड का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। अदालत से बरी हो चुके सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। शुक्रवार को उसका शव हरिद्वार के सप्तऋषि क्षेत्र के भूपतवाला इलाके में सप्त सरोवर रोड स्थित एक किराए की छोटी चाय की दुकान में फंदे से लटका मिला। पुलिस प्रथम दृष्टया इसे आत्महत्या का मामला मान रही है। हालांकि, निठारी कांड में अपनी बेटी को खोने वाले एक पीड़ित पिता ने कोली की मौत को लेकर हत्या की आशंका जताते हुए कई सवाल खड़े किए हैं।

सुरेंद्र कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था। रिहाई के बाद उसने सप्तऋषि क्षेत्र में छोटी सी चाय की दुकान शुरू की थी। बताया जा रहा है कि इसी दुकान पर वह रहता और काम करता था। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया। टीम ने घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस के मुताबिक, मौके से फिलहाल कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पुलिस ने कोली के परिजनों को भी घटना की जानकारी दे दी है।

प्रथम दृष्टया आत्महत्या मान रही पुलिस
हरिद्वार के सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी ने बताया कि सप्तऋषि क्षेत्र में एक व्यक्ति का शव मिला था। मृतक की पहचान सुरेंद्र कोली के रूप में हुई है। प्राथमिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। एफएसएल की टीम मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही मौत के

कारणों की स्थिति और स्पष्ट होगी।
पुलिस के सामने फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि आखिर रिहाई के बाद सामान्य जीवन शुरू करने की कोशिश कर रहे कोली ने ऐसा कदम क्यों उठाया। घटनास्थल, शव की स्थिति, आसपास मौजूद वस्तुओं और अन्य परिस्थितियों की जांच की जा रही है। पुलिस आत्महत्या के अलावा दूसरे संभावित पहलुओं को भी जांच के दौरान ध्यान में रख सकती है।

2006 में सामने आया था निठारी कांड
सुरेंद्र कोली का नाम वर्ष 2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव से जुड़े सिलसिलेवार हत्या और यौन अपराधों के मामलों के बाद देशभर में चर्चा में आया था। निठारी में कई बच्चों और महिलाओं के लापता होने के बाद पुलिस जांच में घटनाओं की भयावह तस्वीर सामने आई थी। मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई। जांच के दौरान सुरेंद्र कोली और उसके मालिक

मोनिंदर सिंह पंधेर को आरोपी बनाया गया।
सीबीआई अदालत में चले मुकदमों में कोली को कई मामलों में दोषी ठहराया गया और उसे मौत की सजा सुनाई गई। मोनिंदर सिंह पंधेर को भी कुछ मामलों में दोषी ठहराया गया था। कोली पर कुल 13 मामलों से जुड़े आरोपों में मुकदमे चले। इनमें 11 मामलों में वह अकेला अभियुक्त था, जबकि दो मामलों में उसे पंधेर के साथ सहअभियुक्त बनाया गया था।

अदालतों में बदली मामले की तस्वीर
निठारी कांड में लंबे समय तक सुरेंद्र कोली मौत की सजा के कैदी के रूप में जेल में रहा, लेकिन समय के साथ अदालतों में उसके खिलाफ मामलों की तस्वीर बदलती गई। वर्ष 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसे मामले से जुड़े 12 मामलों में बरी कर दिया। अदालत ने जांच की प्रक्रिया और साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए थे। मोनिंदर सिंह पंधेर को भी उसके खिलाफ दर्ज मामलों में अदालत से राहत मिली।

इसके बाद एक मामला ऐसा बचा जिसमें कोली की कानूनी लड़ाई जारी रही। वर्ष 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी क्यूरेटिव पिटीशन पर फैसला सुनाते हुए उसे भी बरी कर दिया। इस तरह उसके खिलाफ लंबित आखिरी मामले में भी उसे राहत मिल गई और वह जेल से बाहर आ गया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में पूर्व की अदालतों द्वारा कोली को दोषी ठहराने के लिए इस्तेमाल किए गए साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए थे। अदालत ने जांच में गंभीर खामियों और साक्ष्य जुटाने के बुनियादी मानकों के उल्लंघन का उल्लेख किया था। फैसले के बाद करीब दो दशक से अधिक समय तक जेल में रहे कोली की रिहाई का रास्ता साफ हुआ।

लुक्सर जेल से रिहाई के बाद हरिद्वार पहुंचा था
रिहाई के बाद सुरेंद्र कोली ग्रेटर नोएडा की लुक्सर जेल से बाहर आया था। इसके बाद उसने हरिद्वार में रहने का फैसला किया और सप्तऋषि क्षेत्र में चाय की दुकान शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ महीनों से वह इसी दुकान पर अपना जीवन गुजार रहा था। स्थानीय स्तर पर वह चाय बेचकर अपना खर्च चलाता था।
लेकिन शुक्रवार को उसी दुकान में उसका शव फंदे से लटका मिलने की खबर सामने आते ही एक बार फिर निठारी कांड चर्चा में आ गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि घटना से पहले उसकी मानसिक और सामाजिक स्थिति कैसी थी, वह किन लोगों के संपर्क में था और घटना से पहले उसकी किसी से बातचीत या विवाद तो नहीं हुआ था। इन सभी पहलुओं की जांच के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी।

पीड़ित परिवार ने उठाए मौत पर सवाल
सुरेंद्र कोली की मौत की खबर सामने आने के बाद निठारी कांड के एक पीड़ित परिवार ने आत्महत्या की पुलिसिया आशंका पर सवाल उठाए हैं। अपनी 15 वर्षीय बेटी को खोने वाले 64 वर्षीय झब्बू लाल ने दावा किया कि कोली ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसकी हत्या की गई है। हालांकि, यह उनका आरोप और आशंका है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

झब्बू लाल का कहना है कि अगर कोली जेल में रहते हुए आत्महत्या करता तो उसके पीछे मानसिक दबाव जैसी परिस्थितियों की बात समझ में आ सकती थी, लेकिन जेल से रिहाई के बाद कई महीने बाहर रहने के दौरान उसकी मौत कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने आशंका जताई कि कोली के पास निठारी मामले से जुड़ी ऐसी कोई महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती थी, जिसके सामने आने का डर किसी को रहा हो। उन्होंने यह भी दावा किया कि निठारी मामले में कोली को मुख्य अपराधी के तौर पर पेश किया गया, जबकि उनके अनुसार मोनिंदर सिंह पंधेर की भूमिका की भी गंभीरता से जांच होनी चाहिए थी। हालांकि, अदालतों के फैसलों और वर्तमान पुलिस जांच के संदर्भ में इन दावों को अलग-अलग स्तर पर देखा जाना जरूरी है।

दो दशक बाद भी पीड़ित परिवारों के सवाल कायम
निठारी कांड को करीब दो दशक बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ित परिवारों की पीड़ा और कई सवाल आज भी चर्चा में हैं। निठारी गांव में पीड़ित बच्चों के अब केवल कुछ परिवार ही बचे हैं। कई परिवार समय के साथ गांव छोड़ चुके हैं और लंबे समय तक चली कानूनी लड़ाई से भी दूर हो गए हैं। झब्बू लाल जैसे परिवारों के लिए यह मामला सिर्फ एक मुकदमा नहीं बल्कि वर्षों से चले आ रहे इंतजार और पीड़ा का हिस्सा रहा है। उनका कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ अकेले कानूनी लड़ाई लड़ना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने सरकार से मदद मिलने पर आगे की लड़ाई जारी रखने की बात कही है।

अब पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर नजर
सुरेंद्र कोली की मौत की जांच में फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुलिस के अनुसार मौके से सुसाइड नोट नहीं मिला है। ऐसे में घटनास्थल से मिले साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक निष्कर्ष और कोली की हाल की गतिविधियों की जांच से मौत के कारणों का पता लगाने की कोशिश की जाएगी। पुलिस आत्महत्या मान रही है, जबकि पीड़ित परिवार की ओर से हत्या की आशंका जताई गई है। दोनों पहलुओं के बीच वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। अब सभी की नजर पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिक गई है।

 

Aashish Gupta

आशीष गुप्ता ने जागरण इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया है और राजनीतिक विज्ञान में MA करने के बाद वह राष्ट्रीय सहारा, दैनिक जागरण जैसे देश के प्रमुख समाचार संस्थानों में कार्यरत रहे। 2015 में पीआर कंपनी मेक यू बिग मीडिया प्राइवेट की स्थापना करने के बाद 2021 में फ़ेडरल भारत की शुरुआत की।

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आशीष गुप्ता ने जागरण इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया है और राजनीतिक विज्ञान में MA करने के बाद वह राष्ट्रीय सहारा, दैनिक जागरण जैसे देश के प्रमुख समाचार संस्थानों में कार्यरत रहे। 2015 में पीआर कंपनी मेक यू बिग मीडिया प्राइवेट की स्थापना करने के बाद 2021 में फ़ेडरल भारत की शुरुआत की।

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