Noida: यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में चार दिन में 5500 करोड़ का एमओयू, डिफेंस कॉरिडोर को 40 हजार करोड़ के निवेश का प्रस्ताव
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (एफआईईओ) के अपर महानिदेशक सुविध शाह के अनुसार, ट्रेड शो में अब तक कुल 35,387 बी2बी बैठकें हुई हैं।

ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) 4.0 में चार दिनों के भीतर 5,500 करोड़ रुपये के व्यापारिक समझौते हुए हैं। वहीं, देश-विदेश के खरीदारों की ओर से 12,500 करोड़ रुपये की कारोबारी पूछताछ दर्ज की गई है। 28 सितंबर तक ट्रेड शो में 3,765 एमओयू पर हस्ताक्षर हुए और कुल 5,48,881 लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (एफआईईओ) के अपर महानिदेशक सुविध शाह के अनुसार, ट्रेड शो में अब तक कुल 35,387 बी2बी बैठकें हुई हैं। इनमें रिवर्स बायर्स सेलर्स मीट (आरबीएसएम) के तहत 11,887 बैठकें हुईं, जबकि मुख्य प्रदर्शनी क्षेत्र में 23,500 बैठकें दर्ज की गईं। इन बैठकों के जरिए प्रदेश के उद्यमियों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधे जुड़ने का अवसर मिला।
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने कहा कि सरकार निवेशकों को केवल निवेश के लिए आमंत्रित नहीं करेगी, बल्कि उद्योग स्थापित होने तक उनके साथ खड़ी रहेगी। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे दिन इंडिया एक्सपो मार्ट में उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के ज्ञान सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संवाद, सुविधा और लगातार सहयोग से प्रदेश ने निवेशकों का भरोसा हासिल किया है।
नंदी ने बताया कि डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लखनऊ, कानपुर, झांसी, चित्रकूट, अलीगढ़ और आगरा नोड में करीब 40 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। करीब 1,142 हेक्टेयर भूमि विभिन्न उद्योगों को आवंटित की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि निवेशकों को फाइल लेकर अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार कनेक्टिविटी, आधारभूत ढांचे, टेस्टिंग, तकनीकी सुविधाओं और जरूरी अनुमतियों में सहयोग देगी। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में केवल टैंक, मिसाइल और विमान ही नहीं, बल्कि प्रिसीजन कंपोनेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, बैटरी, सॉफ्टवेयर, एडवांस मटेरियल और लॉजिस्टिक्स में भी एमएसएमई व स्टार्टअप के लिए अवसर हैं।
कॉरिडोर के सीजीएम रिटायर्ड कर्नल संजय सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र की मांग निर्धारित जरूरतों पर आधारित है, इसलिए सप्लाई चेन में उद्योगों के लिए स्पष्ट संभावनाएं हैं।




