Noida: बिल्डर रॉयल वॉकवे से खरीदार परेशान, तीन साल से दुकानों पर नहीं दिया कब्जा
प्रोजेक्ट का प्रमोटर विधि इंफ्राबिल्ड है, जबकि जमीन का आवंटी वर्धमान इंफ्राबिल्ड है। खरीदारों का आरोप है कि जब भी वे बिल्डर पर दबाव बनाते हैं, कंपनी में निदेशक बदल जाते हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता।

सेक्टर गामा-1 स्थित कमर्शियल प्रोजेक्ट रॉयल वॉकवे के खरीदार पिछले तीन साल से अपनी दुकानों के कब्जे के लिए भटक रहे हैं। खरीदारों का आरोप है कि जीवनभर की कमाई लगाकर दुकानें खरीदने के बावजूद उन्हें अब तक कब्जा और रजिस्ट्री नहीं मिली है। दिसंबर 2023 तक पूरा होकर खरीदारों को सौंपा जाने वाला प्रोजेक्ट अक्टूबर 2026 तक भी अधूरा है। खरीदारों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण (GNIDA), यूपी रेरा और प्रदेश सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
सोमवार को खरीदारों ने ग्रेटर नोएडा प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता कर बताया कि प्रोजेक्ट में करीब 592 दुकानें हैं, जिनमें से लगभग 400 बिक चुकी हैं। प्रोजेक्ट का प्रमोटर विधि इंफ्राबिल्ड है, जबकि जमीन का आवंटी वर्धमान इंफ्राबिल्ड है। खरीदारों का आरोप है कि जब भी वे बिल्डर पर दबाव बनाते हैं, कंपनी में निदेशक बदल जाते हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता।
खरीदारों का कहना है कि 23 मार्च 2026 तक ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का बिल्डर पर 48 करोड़ रुपये से अधिक बकाया था। लगातार शिकायतों के बाद प्राधिकरण ने भुगतान योजना बनाई। इसके तहत बिल्डर को पेनल्टी की 25 प्रतिशत राशि, करीब 12 करोड़ रुपये जमा करनी थी। इसके बाद निर्धारित बैंक खाते के जरिए बकाया रकम जमा कराने की व्यवस्था की जानी थी।
आरोप है कि बिल्डर ने अपनी ओर से 12 करोड़ रुपये जमा करने के बजाय खरीदारों से भुगतान मांगना शुरू कर दिया। करीब 144 खरीदारों से रकम जुटाने के बाद 30 सितंबर 2026 को लोअर ग्राउंड, अपर ग्राउंड और पहली मंजिल की लगभग 50 प्रतिशत दुकानों के लिए पार्ट ओसी जारी हो गई। खरीदारों का दावा है कि इसके करीब 20 दिन बाद भी उन्हें दुकानों की पोजीशन नहीं बताई गई और न ही कब्जा दिया गया।
खरीदारों के अनुसार, प्रोजेक्ट में बेसमेंट पार्किंग, सुरक्षित और चालू लिफ्ट, सेंट्रलाइज्ड कूलिंग व एचवीएसी सिस्टम, बिजली सब-स्टेशन और सुरक्षा संबंधी वायरिंग जैसे जरूरी काम अभी अधूरे हैं। उनका सवाल है कि आवश्यक सुविधाएं पूरी हुए बिना पार्ट ओसी कैसे जारी कर दी गई? खरीदारों ने दावा किया कि उन्होंने अगस्त में ही प्राधिकरण और यूपी रेरा को लिखित शिकायत देकर निरीक्षण और भुगतान की निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की थी।
पैसों की निगरानी और कब्जे की समयसीमा तय करने की मांग
खरीदारों ने मांग की है कि निजी खातों में भुगतान लेने पर रोक लगाई जाए और प्रोजेक्ट से संबंधित सभी रकम निर्धारित खाते में जमा कराई जाए। खाते की निगरानी प्राधिकरण करे और नियमित ऑडिट के जरिए पैसों के लेनदेन का हिसाब रखा जाए। साथ ही, कब्जा देने से पहले निर्माण और सुरक्षा सुविधाओं का निरीक्षण हो तथा दुकानों की रजिस्ट्री और कब्जा दिलाने के लिए समयसीमा तय की जाए।
खरीदारों ने चेतावनी दी कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो प्रोजेक्ट का संकट और गहरा सकता है तथा उनकी जीवनभर की कमाई जोखिम में पड़ सकती है। उनका कहना है कि वे किसी का नुकसान नहीं चाहते, बल्कि अपनी दुकानों का कब्जा, रजिस्ट्री और निवेश की सुरक्षा चाहते हैं।



