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Noida: ग्रेनो प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में निर्णय, सहमति से जमीन देने वालों को मिलेगा समान लाभ, आबादी भूखंड के नियम बदले, बनेगा पुलिस थाना

दरअसल, विगत 27 अगस्त 2026 को बोर्ड बैठक में आपसी सहमति से भूमि देने वाले किसानों के लिए भूमि खरीद के दो विकल्प निर्धारित किए थे।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने आपसी सहमति से भूमि देने वाले किसानों को भी अधिग्रहण के समान ही सभी सुविधाएं देने का निर्णय लिया है। बुधवार को संपन्न ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 145वीं बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव पर बोर्ड ने मुहर लग गई है। इसके साथ ही वर्ष 2002 से 2013 के बीच भूमि अधिग्रहण/क्रय से प्रभावित उन किसानों को भी 64.70 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर दिये जाने का निर्णय लिया जाएगा, जिन्हें अब तक इसका लाभ नहीं मिला है।

दरअसल, विगत 27 अगस्त 2026 को बोर्ड बैठक में आपसी सहमति से भूमि देने वाले किसानों के लिए भूमि खरीद के दो विकल्प निर्धारित किए थे। पहले विकल्प में 6415 रुपये प्रति वर्गमीटर और दूसरे में 5725 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर तय की गई। प्रस्ताव के अनुसार, 5725 रुपये प्रति वर्गमीटर का विकल्प चुनने वाले सभी भू-स्वामियों को छह प्रतिशत आबादी भूखंड का लाभ दिया जाएगा, जबकि 6415 रुपये प्रति वर्गमीटर का विकल्प चुनने वालों को यह लाभ नहीं मिलेगा। इसे ध्यान में रखते हुए 27 अगस्त के बाद जमीन अधिग्रहण इसी फैसले के अंतर्गत होगा। इसका उद्देश्य भूमि अधिग्रहण में किसानों को समान सुविधाएं उपलब्ध कराना है। एक अन्य अहम फैसला 2002 से 2013 के बीच भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों के पक्ष में हुआ है। बोर्ड ने इन किसानों को भी 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर दिये जाने के प्रस्ताव पर भी मुहर लगा दी है।

अब नोएडा और यमुना प्राधिकरण की तरह ग्रेटर नोएडा के किसानों को भी 64.7 प्रतिशत मिल सकेगा। बता दें, कि मुआवजा देने के लिए प्राधिकरण ने शासन को प्रस्ताव भेजा था। शासन ने सहमति मिलने पर प्राधिकरण ने इस प्रस्ताव को बोर्ड के समक्ष रखा, जिस पर बोर्ड ने भी अनुमति दे दी है। इस फैसले से लंबे समय से मुआवजे की मांग कर रहे प्रभावित किसानों को राहत मिलेगी।

किसानों की मांग पर ग्रेनो प्राधिकरण ने लिया निर्णय
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने किसानों को आबादी भूखंड आवंटित करने की पात्रता संबंधी नियमों में भी संशोधन करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब किसानों के परिवार में पितामह, पितामही, पिता, माता, पति या पत्नी के साथ-साथ सास-ससुर को भी शामिल कर लिया गया है। इस प्रस्ताव पर भी बोर्ड ने मुहर लगा दी है। प्राधिकरण का उद्देश्य पात्र किसानों को आबादी भूखंड आवंटन का लाभ दिलाना और उन्हें अनावश्यक रूप से वंचित होने से बचाना है। यहां के किसान मांग कर रहे थे कि भूमि अर्जन की कार्रवाई से पहले कई मामलों में किसानों ने अपनी जमीन अपने पुत्रवधू के पक्ष में हस्तांतरित कर दी जाती है। प्राधिकरण में प्रचलित नीति के अनुसार ऐसे मामलों में पुत्र वधु आबादी भूखंड आवंटन के लाभ से वंचित रह जाती हैं। इसलिए अब निर्धारित शर्तों में संशोधन करते हुए पात्रता के दायरे में सास-ससुर को भी शामिल करने की संस्तुति की गई है।

ग्रेटर नोएडा में लीज डीड की राह अब और होगी आसान
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने ग्रामीण आबादी की जमीन के लीज बैक मामलों में आ रही कानूनी अड़चनों को दूर करने की पहल की है। किसानों की मांग पर लीज बैक के लिए जमा की जाने वाली धनराशि पर ब्याज माफ करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसके लिए प्राधिकरण की ग्रामीण आबादी स्थल प्रबंधन एवं विनियमितीकरण विनियमावली में संशोधन का निर्णय लिया गया है। इस प्रस्ताव को अब शासन को भेजा जाएगा।

दरअसल, लीज बैक के लिए निर्धारित धनराशि का भुगतान तय समय में नहीं करने पर किसानों को ब्याज देना होता है। तीन माह से अधिक देरी होने पर निर्धारित दर से ब्याज लग जाता है, जबकि एक वर्ष के भीतर भुगतान नहीं होने पर पट्टा निरस्त करने का प्रावधान भी है। किसानों की तरफ से ब्याज माफ करने की मांग की जा रही थी। प्राधिकरण बोर्ड की स्वीकृति के बाद अब इस प्रस्ताव को शासन को भेजा जाएगा। इसके साथ ही ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के ग्रामीण आबादी के मामलों में किसानों को लीज बैक का लाभ देने के लिए नई प्रक्रिया अपनाने के प्रस्ताव पर भी मुहर लग गई है। इसके तहत किसानों के हिस्से का निर्धारण कर लीज डीड संपन्न कराई जाएगी। शासनादेश 24 अप्रैल 2010 तथा ग्रामीण आबादी स्थल (प्रबंधन एवं विनियमितीकरण) विनियमावली-2011 और संशोधित 2015 के प्रावधानों के तहत प्राधिकरण बोर्ड ने अधिग्रहित एवं कब्जा प्राप्त भूमि के एवज में संबंधित किसानों के पक्ष में लीज बैक के निर्णय लिया गया।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी
गाजियाबाद में न्यू हॉलैंड ट्रैक्टर फैक्ट्री से एनएच-24 (अब एनएच-9) तक लिंक रोड के निर्माण से विस्थापित किसानों को राहत मिलने का रास्ता साफ हो गया है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने किसानों के पुनर्वास के लिए ग्राम चिपियाना खुर्द उर्फ तिगरी में उपलब्ध 5.48 एकड़ भूमि पर लीज डीड कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

प्राधिकरण की 141वीं बोर्ड बैठक के निर्णय के अनुसार, लिंक रोड निर्माण में प्रभावित उन मूल किसानों को भूखंड की लीज डीड कराई जाएगी, जिनकी भूमि सड़क निर्माण की जद में आई है और जिनका नाम संबंधित राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। इस प्रक्रिया में लीज डीड पर होने वाला खर्च भी अब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण वहन करेगा। दरअसल, इसी प्रकरण में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेष पर प्राधिकरण की ओर से गठित समिति ने 17 जून 2026 की बैठक में पात्र किसानों की लीज डीड के लिए आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करने और सत्यापन के बाद प्रस्ताव आगे बढ़ाने की संस्तुति की। अब संबंधित किसानों के अभिलेखों की जांच कर प्रक्रिया पूरी की जाएगी। संबंधित किसानों को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की तरफ से जारी आवंटन पत्र की मूल प्रति और नक्षा 11 की सत्यापित प्रति या फिर किसान द्वारा क्रय किए गए खसरे में बैनामा की मूल प्रति देनी होगी। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के सत्यापन के बाद किसानों के पक्ष में लीज डीड करने और उसका खर्च भी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण वहन करेगा।

ग्रेटर नोएडा में बनेगा सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र
ग्रेटर नोएडा में युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए ग्रेटर नोएडा के सेक्टर ईकोटेक-1 स्थित औद्योगिक भूखंड संख्या-01 की 32,880 वर्ग मीटर जमीन यानी करीब आठ एकड़ क्षेत्रफल को चिंहित कर आरक्षित करने के प्रस्ताव पर प्राधिकरण बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। भूमि का निशुल्क आवंटन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग की सहमति के बाद किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य युवाओं को उद्योगों और सेवा क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ना है। इसके तहत तकनीकी और गैर-तकनीकी पृष्ठभूमि के युवाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण, भाषा प्रशिक्षण और प्लेसमेंट संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। योजना के माध्यम से स्थानीय युवाओं को देश के अन्य राज्यों और विदेशों में रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा। प्रशिक्षणार्थियों के लिए हॉस्टल तथा कार्यालय और प्लेसमेंट सेल जैसी सुविधाएं विकसित करने का प्रावधान है।

ईकोटेक-1 एक्सटेंशन में बनेगा पुलिस थाना
ग्रेटर नोएडा के इकोटेक-1 एक्सटेंशन क्षेत्र में पुलिस थाना स्थापित करने का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। ग्राम कासना में प्रस्तावित पुलिस स्टेशन के निर्माण के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 3957 वर्ग मीटर भूमि निशुल्क आवंटित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था मजबूत करने और औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

दरअसल, अपर पुलिस आयुक्त, मुख्यालय, गौतमबुद्ध नगर की ओर से ग्राम कासना में पुलिस स्टेशन बनाने के लिए भूमि की मांग की गई थी। इसके बाद परियोजना विभाग ने सेक्टर ईकोटेक-1 एक्सटेंशन में स्थित भूखंड को चिंहित कर पुलिस विभाग को लीज प्लान उपलब्ध कराया। संबंधित भूखंड की लीज डीड कराने के लिए पुलिस विभाग ने 31 जुलाई 2025 को सहमति देते हुए अनुरोध किया था। प्रस्ताव में शासन की उस नीति का भी उल्लेख किया गया है, जिसके तहत औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की तरफ से विकसित योजनाओं में पुलिस थानों और चौकियों के लिए आवश्यक भूमि निशुल्क हस्तांतरित की जा सकती है। ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं। ऐसे में नए थाने की स्थापना से कर्मचारियों, उद्यमियों और स्थानीय लोगों को सुरक्षा संबंधी सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। प्राधिकरण बोर्ड ने इस प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी है। अब भूखंड का निशुल्क आवंटन कर पुलिस स्टेशन निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

ग्रेटर नोएडा में 220 केवी का एक और बिजलीघर मंजूर
औद्योगिक क्षेत्र ईकोटेक-10 में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने विद्युत उपकेंद्र के उच्चीकरण की तैयारी की है। इसके तहत मौजूदा 132/33 केवी जीआईएस विद्युत उपकेंद्र को 220/13/33 केवी जीआईएस उपकेंद्र में अपग्रेड किया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग 226 करोड़ रुपये (निर्माण और जमीन की कीमत को मिलाकर) खर्च होने का अनुमान है।

प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव पर स्वीकृति मिल गई है। प्रस्ताव के तहत उच्चीकरण के लिए कुल 8,945 वर्गमीटर भूमि उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड को निशुल्क उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। इस बिजलीघर से ईकोटेक-10, ईकोटेक-11, घंघोला, मायचा आदि गांवों, सेक्टरों व औद्योगिक संस्थानों की भविष्य की बिजली जरूरत पूरी हो सकेगी। दरअसल, इस क्षेत्र में विभिन्न औद्योगिक इकाइयों को छोटे-बड़े भूखंड आवंटित किए गए हैं। औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ बिजली की मांग बढ़ने की संभावना है। प्रस्ताव के अनुसार निर्माण लागत और भूमि की लागत को मिलाकर कुल अनुमानित व्यय लगभग 226 करोड़ रुपये होगा। इससे क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

 

Aashish Gupta

आशीष गुप्ता ने जागरण इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया है और राजनीतिक विज्ञान में MA करने के बाद वह राष्ट्रीय सहारा, दैनिक जागरण जैसे देश के प्रमुख समाचार संस्थानों में कार्यरत रहे। 2015 में पीआर कंपनी मेक यू बिग मीडिया प्राइवेट की स्थापना करने के बाद 2021 में फ़ेडरल भारत की शुरुआत की।

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आशीष गुप्ता ने जागरण इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया है और राजनीतिक विज्ञान में MA करने के बाद वह राष्ट्रीय सहारा, दैनिक जागरण जैसे देश के प्रमुख समाचार संस्थानों में कार्यरत रहे। 2015 में पीआर कंपनी मेक यू बिग मीडिया प्राइवेट की स्थापना करने के बाद 2021 में फ़ेडरल भारत की शुरुआत की।

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