Greater Noida: उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट का हुआ शिलान्यास, जानिए क्या है खास
यह देश की पहली डिस्प्ले ड्राइवर इंटीग्रेटेड सर्किट (डीडीआईसी) ओसैट सुविधा होगी। मोबाइल, टेलीविजन, लैपटॉप और ऑटोमोबाइल डिस्प्ले में प्रयुक्त होने वाले डीडीआईसी चिप्स की अब तक भारत में सीमित उत्पादन क्षमता थी।

एचसीएल और फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप की तरफ से 3,700 करोड़ के निवेश से सेमीकंडक्टर यूनिट की स्थापना होगी। शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल तरीके से रिमोट के जरिए शिलान्यास किया। इसमें स्मार्टफोन, लैपटॉप, ऑटोमोबाइल सिस्टम और औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स का उत्पादन किया जाएगा। प्रति माह 20,000 वेफर्स की प्रोसेसिंग क्षमता वाला यह केंद्र देश में सेमीकंडक्टर कॉम्पोनेंट्स की बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा।
यह देश की पहली डिस्प्ले ड्राइवर इंटीग्रेटेड सर्किट (डीडीआईसी) ओसैट सुविधा होगी। मोबाइल, टेलीविजन, लैपटॉप और ऑटोमोबाइल डिस्प्ले में प्रयुक्त होने वाले डीडीआईसी चिप्स की अब तक भारत में सीमित उत्पादन क्षमता थी। इस यूनिट के स्थापित होने से भारत की आयात निर्भरता में कमी आएगी और घरेलू विनिर्माण को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका को सशक्त करेगा।
यीडा क्षेत्र बनेगा टेक्नोलॉजी हब
यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र पहले ही लॉजिस्टिक्स और एयरोस्पेस निवेश के लिए चर्चित रहा है। अब सेमीकंडक्टर उद्योग के प्रवेश से यह क्षेत्र हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के रूप में विकसित होने की राह पर है। एचसीएल ग्रुप और फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप के संयुक्त निवेश से स्थापित यह मेगा यूनिट तकनीकी उत्कृष्टता का केंद्र बनेगी। परियोजना से प्रतिवर्ष लगभग ₹45,000 करोड़ के जीडीपी योगदान का अनुमान है।
रोजगार और कौशल का नया अध्याय
इस यूनिट से करीब 3,500 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। इससे स्थानीय युवाओं को उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में अवसर मिलेंगे। परियोजना के अंतर्गत उत्कृष्टता केंद्र, अनुसंधान प्रयोगशालाएं और सिमुलेशन लैब स्थापित की जाएंगी, जो चिप डिजाइन और परीक्षण के क्षेत्र में नवाचार को गति देंगी। स्थानीय विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के साथ मिलकर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित होंगे, जिससे प्रदेश में कौशल आधारित औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
यह परियोजना “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” की अवधारणा को धरातल पर उतारने का सशक्त उदाहरण है। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यीडा क्षेत्र में यह पहल उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी सेमीकंडक्टर गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है। ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर बढ़ते देश के लिए यह शिलान्यास तकनीकी स्वाभिमान और औद्योगिक आत्मविश्वास का प्रतीक बनकर उभरा है।



