ग्रैंडथुम विवाद: प्राधिकरण के नोटिस के बाद बिल्डर ने भेजा होल्डिंग चार्ज का नोटिस, खरीदारों ने बताया दबाव बनाने की कोशिश

ग्रेटर नोएडा वेस्ट – ग्रैंडथुम (Grandthum) कमर्शियल प्रोजेक्ट एक बार फिर विवादों में है। बिना रजिस्ट्री यूनिट का कब्जा देने और कथित रूप से मेंटेनेंस शुल्क वसूलने की शिकायतों पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा बिल्डर को नोटिस जारी किए जाने के बाद अब बिल्डर ने नॉन-पजेशन यूनिट मालिकों को ई-मेल भेजकर 15 दिनों के भीतर कब्जा लेने, अन्यथा होल्डिंग चार्ज (Holding Charges) लगाए जाने की चेतावनी दी है। इससे खरीदारों में नाराजगी बढ़ गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कई यूनिट मालिकों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से शिकायत की थी कि बिल्डर बिना रजिस्ट्री के ही यूनिट का कब्जा देने का प्रयास कर रहा है और नियमानुसार प्रक्रिया पूरी किए बिना मेंटेनेंस शुल्क की मांग की जा रही है। शिकायतों का संज्ञान लेते हुए प्राधिकरण ने बिल्डर को नोटिस जारी कर मंगलवार तक विस्तृत जवाब तलब किया है।
इसी बीच बिल्डर ने उन खरीदारों को ई-मेल भेजा है जिन्होंने अभी तक अपनी यूनिट का कब्जा नहीं लिया है। ई-मेल में 15 दिनों के भीतर पजेशन लेने के लिए कहा गया है, अन्यथा होल्डिंग चार्ज लागू करने की बात कही गई है।
यूनिट मालिकों का आरोप है कि जब मामला पहले से ही ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के विचाराधीन है और बिल्डर से जवाब मांगा जा चुका है, तब इस तरह का नोटिस भेजना खरीदारों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव बनाने का प्रयास है। उनका कहना है कि जब तक रजिस्ट्री, सभी आवश्यक वैधानिक औपचारिकताएं और प्रोजेक्ट की मूलभूत सुविधाएं नियमानुसार उपलब्ध नहीं कराई जातीं, तब तक किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क वसूलना उचित नहीं है।
खरीदारों ने कहा कि उन्होंने अपनी आपत्तियां प्राधिकरण के समक्ष दर्ज करा दी हैं और उन्हें उम्मीद है कि जांच पूरी होने तक बिल्डर कोई दंडात्मक या वित्तीय कार्रवाई नहीं करेगा। यदि इसके बावजूद होल्डिंग चार्ज लगाने का प्रयास किया गया, तो वे दोबारा प्राधिकरण का दरवाजा खटखटाएंगे और आवश्यक होने पर कानूनी कार्रवाई भी करेंगे।
यूनिट मालिकों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से मांग की है कि बिल्डर के जवाब का निष्पक्ष परीक्षण कर नियमों के अनुरूप कार्रवाई की जाए तथा जांच पूरी होने तक खरीदारों पर किसी भी प्रकार का आर्थिक दबाव न पड़ने दिया जाए।
अब इस मामले में सभी की निगाहें मंगलवार को बिल्डर के जवाब और उसके बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा की जाने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।



