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सिर्फ 7–9 मिमी के चीरे से हुई स्पाइन सर्जरी, अगले दिन चलने लगीं 33 वर्षीय महिला

नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में एडवांस्ड एंडोस्कोपिक तकनीक से हुआ इलाज, छह महीने से कमर और पैर के दर्द से थीं परेशान

नोएडा। नोएडा एक्सटेंशन स्थित यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में एडवांस्ड एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी के जरिए 33 वर्षीय महिला का सफल उपचार किया गया। महिला पिछले छह महीने से कमर और दाईं टांग में तेज दर्द की समस्या से जूझ रही थीं। डॉक्टरों ने महज 7–9 मिलीमीटर का चीरा लगाकर सर्जरी की और प्रभावित नसों पर पड़ रहे दबाव को दूर किया। सर्जरी के अगले दिन ही मरीज चलने-फिरने लगीं।

चिकित्सकीय जांच में महिला की रीढ़ के निचले हिस्से में L4-L5 स्तर पर स्लिप डिस्क और स्पाइनल कैनाल के संकरे होने की समस्या सामने आई थी। इसके कारण नसों पर दबाव पड़ रहा था, जिससे कमर से दाईं टांग तक दर्द फैल रहा था। लंबे समय से जारी इस परेशानी के कारण महिला की रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित हो रही थीं।

यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन के सीनियर कंसल्टेंट एवं न्यूरोसर्जन डॉ. अंकित अग्रवाल के नेतृत्व में न्यूरोसर्जरी टीम ने एडवांस्ड एंडोस्कोपिक तकनीक से ऑपरेशन किया। इस प्रक्रिया में विशेष कैमरे और सूक्ष्म उपकरणों की मदद से छोटे चीरे के जरिए प्रभावित हिस्से तक पहुंचकर नसों पर पड़ रहे दबाव को हटाया गया।

डॉ. अंकित अग्रवाल के अनुसार, मरीज की शारीरिक बनावट के कारण सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। ऐसे में मरीज की स्थिति को ध्यान में रखते हुए मिनिमली इनवेसिव तकनीक का चयन किया गया। उन्होंने बताया कि इस तकनीक का उद्देश्य आसपास की मांसपेशियों और स्वस्थ ऊतकों को कम से कम नुकसान पहुंचाते हुए प्रभावित हिस्से का उपचार करना है।

डॉक्टरों के मुताबिक, पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में उपयुक्त मरीजों में एंडोस्कोपिक तकनीक से ऑपरेशन के बाद दर्द और अस्पताल में रहने की अवधि कम करने के साथ सामान्य गतिविधियों में जल्दी लौटने में मदद मिल सकती है। हालांकि, हर मरीज के लिए यह तकनीक उपयुक्त नहीं होती। सर्जरी का निर्णय बीमारी की गंभीरता और मरीज की चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर लिया जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कमर से पैर तक फैलने वाला दर्द, पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या चलने में परेशानी नसों पर दबाव के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण लगातार बने रहने या बढ़ने पर विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। वहीं, पैरों में अचानक कमजोरी बढ़ने या पेशाब अथवा मल पर नियंत्रण में परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

यह मामला आधुनिक एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी के जरिए चुनिंदा मरीजों के उपचार में मिनिमली इनवेसिव तकनीकों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

Vishnu Pratap

मेरा नाम विष्णु प्रताप है। मेरा जन्म 18 मई 2004 को उत्तर प्रदेश के एटा जिले में हुआ। पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक करियर नहीं, बल्कि एक जुनून है। वर्तमान में मैं Federal Bharat News में रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हूं। मुझे अंतरराष्ट्रीय संबंध, इतिहास, राजनीति, युद्ध से जुड़ी खबरें, बिज़नेस और NGO से संबंधित विषयों में गहरी रुचि है। खाली समय में मुझे पढ़ना और अपने दोस्तों के साथ समय बिताना अच्छा लगता है।

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