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Noida: किसानों के मुद्दों पर यमुना प्राधिकरण के साथ बनी सहमति, एसआईटी मामलों के निस्तारण जल्द

यमुना प्राधिकरण के 521 आबादी प्रकरणों पर भी चर्चा हुई। मोर्चा ने बताया कि पहले स्वीकृत 306 मामलों में से जांच के बाद 100 सही पाए गए

यमुना प्राधिकरण पर 21 अक्टूबर को हुए किसान आंदोलन और टकराव के बाद गुरुवार को किसान संघर्ष मोर्चा के 250 से अधिक कार्यकर्ताओं और प्रतिनिधियों की प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के साथ वार्ता हुई। बैठक में किसानों के लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। मोर्चा के अनुसार, ग्रेटर नोएडा के एसआईटी मामलों का दो से तीन सप्ताह में निस्तारण करने, यमुना प्राधिकरण के खारिज आबादी प्रकरणों की दोबारा सुनवाई शुरू करने, अतिरिक्त मुआवजे के भुगतान में तेजी लाने और पुनर्वास के मकानों की रजिस्ट्री जल्द कराने पर सहमति बनी।

बैठक में 10 प्रतिशत आबादी प्लॉट, ग्रेटर नोएडा के एसआईटी से संबंधित लंबित मामले, यमुना प्राधिकरण के 521 आबादी प्रकरण, 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा और जेवर एयरपोर्ट से प्रभावित परिवारों के युवाओं को स्थायी रोजगार देने जैसे मुद्दे उठाए गए। वार्ता के बाद कार्यवृत्त तैयार किया गया है, जिसकी आधिकारिक प्रतिलिपि मिलना अभी बाकी है।

एसआईटी के लंबित मामलों पर दो से तीन सप्ताह में कार्रवाई
किसान संघर्ष मोर्चा ने ग्रेटर नोएडा के आबादी प्रकरणों से जुड़े एसआईटी के लंबित मामलों का मुद्दा उठाया। मोर्चा के मुताबिक, शिफ्टिंग से संबंधित 211, बादलपुर के 208 और अन्य 151 मामलों की रिपोर्ट लंबित है। अधिकारियों ने इन मामलों के निस्तारण के लिए दो से तीन सप्ताह में कार्रवाई पूरी करने का आश्वासन दिया।

आबादी के खारिज मामलों की दोबारा सुनवाई
यमुना प्राधिकरण के 521 आबादी प्रकरणों पर भी चर्चा हुई। मोर्चा ने बताया कि पहले स्वीकृत 306 मामलों में से जांच के बाद 100 सही पाए गए, जबकि शेष 206 किसानों की लीज प्रभावित हुई। इसके अलावा 221 अन्य मामलों में से करीब 190 खारिज किए जाने की बात कही गई। मोर्चा ने मांग की कि नियमों के अनुसार सभी मामलों की समीक्षा हो और किसानों को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाए। इस पर दोबारा सुनवाई शुरू करने का आश्वासन मिला।

64.7 प्रतिशत मुआवजे के भुगतान में तेजी
अधिकारियों के अनुसार, 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे के लिए निर्धारित 4,200 करोड़ रुपये में से करीब 3,200 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। लगभग 1,000 करोड़ रुपये का भुगतान बाकी है। प्राधिकरण ने अपने हिस्से का भुगतान तेज करने और संबंधित कंपनियों पर दबाव बनाकर शेष राशि वितरित कराने का प्रयास करने की बात कही।

10 प्रतिशत प्लॉट के लिए शासन स्तर पर पैरवी
10 प्रतिशत आबादी प्लॉट के मुद्दे पर अधिकारियों ने बताया कि संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। मोर्चा ने 13 नवंबर को अपर मुख्य सचिव, औद्योगिक विकास के साथ प्रस्तावित वार्ता में तीनों प्राधिकरणों के अधिकारियों के साथ किसान प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग की, ताकि इस मुद्दे पर ठोस निर्णय की दिशा में प्रगति हो सके।

एयरपोर्ट प्रभावित युवाओं के रोजगार पर सहमति नहीं
जेवर एयरपोर्ट से प्रभावित किसान परिवारों के युवाओं को स्थायी रोजगार देने की मांग पर सहमति नहीं बन सकी। अधिकारियों का कहना था कि एयरपोर्ट परियोजना में स्थायी प्रकृति के रोजगार उपलब्ध नहीं हैं और अधिकांश रोजगार वेंडर कंपनियों के माध्यम से दिए जाते हैं। मोर्चा ने इस मुद्दे पर आगे भी संघर्ष जारी रखने की बात कही। पुनर्वास के तहत आवंटित मकानों की रजिस्ट्री जल्द कराने का भी आश्वासन दिया गया।

समयसीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो फिर होगा घेराव
किसान संघर्ष मोर्चा के नेता सुखबीर खलीफा, सोरन प्रधान, डॉ. रुपेश वर्मा और वीर सिंह नागर ने कहा कि किसानों के मुद्दों का समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा। वीर सिंह नागर ने चेतावनी दी कि तय समयसीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो हजारों किसान दोबारा यमुना प्राधिकरण का घेराव करेंगे।

बैठक में किसान संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों के अलावा किसान सभा के महासचिव संदीप भाटी सहित अनेक किसान नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। मोर्चा ने कहा कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं। किसानों को उनके अधिकारों, मुआवजे, आबादी भूखंड, पुनर्वास और रोजगार के मामलों में धरातल पर परिणाम चाहिए।

Aashish Gupta

आशीष गुप्ता ने जागरण इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया है और राजनीतिक विज्ञान में MA करने के बाद वह राष्ट्रीय सहारा, दैनिक जागरण जैसे देश के प्रमुख समाचार संस्थानों में कार्यरत रहे। 2015 में पीआर कंपनी मेक यू बिग मीडिया प्राइवेट की स्थापना करने के बाद 2021 में फ़ेडरल भारत की शुरुआत की।

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आशीष गुप्ता ने जागरण इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया है और राजनीतिक विज्ञान में MA करने के बाद वह राष्ट्रीय सहारा, दैनिक जागरण जैसे देश के प्रमुख समाचार संस्थानों में कार्यरत रहे। 2015 में पीआर कंपनी मेक यू बिग मीडिया प्राइवेट की स्थापना करने के बाद 2021 में फ़ेडरल भारत की शुरुआत की।

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