विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस 2026: हर सेकंड की सही कार्रवाई बचा सकती है जीवन

ग्रेटर नोएडा/नोएडा – विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस 2026 के अवसर पर विशेषज्ञों ने आपात स्थिति में प्राथमिक चिकित्सा के महत्व और सही समय पर किए गए शुरुआती हस्तक्षेप के प्रति लोगों को जागरूक किया। विशेषज्ञों के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट, अत्यधिक रक्तस्राव, दम घुटने, जलने और गंभीर चोट जैसी परिस्थितियों में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, ओमेगा-1, ग्रेटर नोएडा की सीनियर कंसल्टेंट एवं एचओडी–इमरजेंसी मेडिसिन डॉ. फरहा इमाम ने कहा कि प्राथमिक चिकित्सा वह तत्काल देखभाल है, जो किसी घायल या अचानक बीमार व्यक्ति को पेशेवर चिकित्सा सहायता मिलने से पहले दी जाती है। उन्होंने बताया कि आपात स्थिति में सबसे पहले आसपास की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए, इसके बाद व्यक्ति की प्रतिक्रिया और सांस की जांच करनी चाहिए तथा जरूरत पड़ने पर तुरंत आपातकालीन सहायता बुलानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सामान्य सांस न लेने की स्थिति में सीपीआर शुरू किया जाना चाहिए और उपलब्ध होने पर एईडी का उपयोग किया जा सकता है। अत्यधिक रक्तस्राव में साफ गॉज या कपड़े से लगातार दबाव डालना चाहिए। वहीं जलने की स्थिति में प्रभावित हिस्से को करीब 20 मिनट तक बहते पानी से ठंडा करने की सलाह दी जाती है। उन्होंने बर्फ, टूथपेस्ट या अन्य घरेलू नुस्खों के इस्तेमाल से बचने की बात कही। फ्रैक्चर की आशंका में घायल हिस्से को स्थिर रखना जरूरी है।
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन की सीनियर कंसल्टेंट एवं एचओडी–इमरजेंसी डॉ. नवीन प्रकाश वर्मा ने कहा कि प्राथमिक चिकित्सा में सही समय पर किया गया हस्तक्षेप आपात स्थिति के परिणाम को बेहतर कर सकता है। उन्होंने कहा कि हर घर, स्कूल और कार्यस्थल पर जरूरी सामग्री से लैस फर्स्ट-एड किट उपलब्ध होनी चाहिए।
डॉ. वर्मा के अनुसार, फर्स्ट-एड किट में गॉज, पट्टियां, दस्ताने, एंटीसेप्टिक वाइप्स, कैंची और कोल्ड पैक जैसी आवश्यक सामग्री होनी चाहिए। उन्होंने लोगों से बुनियादी फर्स्ट एड और सीपीआर प्रशिक्षण लेने की अपील करते हुए कहा कि प्रशिक्षण से लोग आपात स्थिति में घबराने के बजाय शांत रहकर सही कदम उठा सकते हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि प्राथमिक चिकित्सा केवल मेडिकल किट रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि सही समय पर सही कार्रवाई करने की जानकारी और प्रशिक्षण भी उतना ही जरूरी है।




