ऑपरेशन सिंदूर पर टिप्पणी: प्रोफेसर अली खान की गिरफ्तारी पर बवाल

नोएडा: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की महिला अधिकारियों पर टिप्पणी करने के मामले में अशोका यूनिवर्सिटी, सोनीपत के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की गिरफ्तारी ने तूल पकड़ लिया है।
हरियाणा राज्य महिला आयोग के संज्ञान लेने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, प्रोफेसर अली खान ने अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
कोर्ट ने याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है और अगले कुछ दिनों में इस पर सुनवाई हो सकती है।
प्रोफेसर अली खान का राजनीतिक परिवार से संबंध
प्रोफेसर अली खान एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। वे आमिर मोहम्मद खान के बेटे हैं, जिन्हें राजा साहब महमूदाबाद के नाम से भी जाना जाता है।
महमूदाबाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रह चुके हैं और अखिलेश यादव के करीबी माने जाते थे। अली खान की शादी जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री हसीब द्राबू की बेटी से हुई है।
गिरफ्तारी का विरोध: सुप्रीम कोर्ट और राजनीतिक समर्थन
गिरफ्तारी के विरोध में अली खान ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और भाजपा के पूर्व सांसद रितेश पांडेय ने उनकी गिरफ्तारी को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।
सोशल मीडिया पर भी कई लोग उनके समर्थन में उतर आए हैं। उनका कहना है कि प्रोफेसर ने सेना या उसकी कार्रवाई के खिलाफ कुछ भी आपत्तिजनक नहीं कहा था।
क्या है आरोप?
प्रोफेसर अली खान पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भारतीय सेना की महिला अधिकारियों का अपमान किया और सांप्रदायिक वैमनस्य को बढ़ावा दिया।
हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया ने स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रोफेसर को नोटिस जारी किया था। भाजपा युवा मोर्चा के नेता योगेश जठेरी की शिकायत पर भी सोनीपत थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई।
गिरफ्तारी के खिलाफ समर्थन
प्रोफेसर की गिरफ्तारी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी पर बहस छेड़ दी है। कई शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता उनके समर्थन में सामने आए हैं।
करीब 1,100 लोगों ने याचिका पर हस्ताक्षर कर उनकी रिहाई की मांग की है। लोगों का आरोप है कि सरकार ने गिरफ्तारी में दोहरा मापदंड अपनाया है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम सामाजिक जिम्मेदारी
यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन पर सवाल खड़ा कर रहा है।
समर्थकों का मानना है कि प्रोफेसर अली खान ने किसी भी प्रकार से देश या सेना के खिलाफ टिप्पणी नहीं की। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट हो सकता है कि क्या उनकी गिरफ्तारी उचित थी या नहीं।




