Noida: ‘महिलाएं संभालेंगी जिम्मेदारी तो ख़त्म होगी पारिवारिक यारी, पंकज चौधरी का सपा-कांग्रेस पर तंज
परिवारवादी पार्टियों पर सीधा हमला करते हुए कहा कि इन परिवारवादी पार्टियों को पता है कि देश की राजनीति में एक बार महिलाओं को 33 प्रतिशत भागीदारी का अधिकार मिल गया, तो इन पार्टियों का अंत सुनिश्चित है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बुधवार को नोएडा में प्रेसवार्ता कर सपा और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। नारी शक्ति वंदन अधिनियिम के विरोध पर कहा कि यूपी में महिलाएं बाहर निकलने में डरती थी। बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम की वजह से कामकाजी महिलाओं की संख्या 36-37 प्रतिशत हो गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि राज्य में महिलाएं खूब आगे बढ़ें और सामान्य परिवार की महिलाएं भी विधायक-सांसद बने। उन्होंने कहा कि सपा-कांग्रेस जैसी पार्टियां, जो परिवारवाद की अमर बेल पर फलफूल रही हैं, इस बिल का विरोध किया और इसके फेल होने का जश्न मनाया। इन पार्टियों ने इस बिल का विरोध नहीं किया बल्कि इसके पीछे इन्होंने महिलाओं के जीवन में आने वाले ऐतिहासिक बदलाव का विरोध किया है।
उत्तर प्रदेश का नहीं बल्कि देश का सबसे तेज प्रगति करने वाला शहर है। औद्यौगिक नगरी में हजारों कंपनियां, उद्योग-धंधे मौजूद हैं। राज्य की तरक्की का रास्ता इस शहर से होकर गुज़रता है। सपा-कांग्रेस को दिन-रात सिर्फ अपने वोट बैंक की फ़िक्र रहती है। इन्हें महिलाओं के मान-सम्मान और उत्थान से कोई मतलब नहीं है। जब-जब मौक़ा आया ये लोग महिलाओं के विरोध में खड़े मिले हैं।
उन्होंने महिलाएं संभालेंगी जिम्मेदारी, तो ख़त्म होगी पारिवारिक यारी पर कहा कि महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस से यारी निभाकर समाजवादी पार्टी ने अपनी असली चरित्र और चेहरा सबके सामने ला दिया है। भाजपा महिला उत्थान में पूर्ण विश्वास रखती है। गृहमंत्री ने पूरे देश में 50 फ़ीसदी सीटें बढ़ाने की गारंटी दे दी थी। इसके बावजूद विपक्ष ने दुष्चक्र रचकर महिलाओं की हकदारी को कुचल दिया।
परिवारवादी पार्टियों पर सीधा हमला करते हुए कहा कि इन परिवारवादी पार्टियों को पता है कि देश की राजनीति में एक बार महिलाओं को 33 प्रतिशत भागीदारी का अधिकार मिल गया, तो इन पार्टियों का अंत सुनिश्चित है। उन्होंने परिवारवादी पार्टियों के नारी शक्ति वंदन बिल के विरोध के कारण पर बोलते हुए कहा कि दरअसल इन परिवारवादी पार्टियों के एजेंडे में देश के सामान्य परिवारों, मध्यम वर्ग की महिलाओं के लिए कोई जगह नहीं है।




