मानसून की पहली बारिश में डूबा नोएडा, CONRWA ने प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

नोएडा – नोएडा में मानसून पूर्व हुई पहली ही बारिश के बाद विभिन्न सेक्टरों और अंडरपासों में जलभराव की गंभीर समस्या सामने आने पर कन्फेडरेशन ऑफ नोएडा रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (CONRWA) ने नोएडा प्राधिकरण को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
CONRWA के अध्यक्ष डॉ. पी.एस. जैन और महासचिव राजीव गर्ग ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी को भेजे पत्र में कहा है कि हर वर्ष मानसून से पहले नालों और नालियों की सफाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में शहर के कई हिस्सों में जलभराव होने से इन दावों की पोल खुल गई है।
संस्था ने आरोप लगाया कि नालों की सफाई के टेंडर समय पर जारी नहीं किए जाते, जिसके कारण सफाई कार्य मानसून शुरू होने तक अधूरा रह जाता है। इसके अलावा छोटी नालियों को बड़े नालों से जोड़ने वाले जंक्शन प्वाइंट्स पर जमा कचरा और गाद जल निकासी व्यवस्था को बाधित कर रही है।
CONRWA ने यह भी कहा कि सफाई के बाद निकाली गई सिल्ट कई बार दिनों तक सड़क किनारे पड़ी रहती है और बारिश होने पर दोबारा नालों में बह जाती है, जिससे सफाई कार्य का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है तथा सरकारी धन की बर्बादी होती है।
संस्था ने प्राधिकरण से नालों और नालियों की सफाई के लिए स्पष्ट वार्षिक कार्य-योजना और समयबद्ध रोस्टर बनाने की मांग की है। साथ ही यह भी आरोप लगाया कि कई बार सीमित क्षेत्रों में औपचारिक सफाई कर कार्य पूर्ण होने का दावा कर दिया जाता है, जबकि अधिकांश क्षेत्रों में वास्तविक स्थिति जस की तस बनी रहती है।
पत्र में विशेष रूप से सेक्टर 11, 12, 18, 19, 20, 22, 26, 27, 28, 33, 34, 36, 37, 55, 57, 62, 63, 65, 66, 67 और 125 सहित अनेक क्षेत्रों तथा अधिकांश अंडरपासों में हर वर्ष होने वाले जलभराव का उल्लेख किया गया है। CONRWA के अनुसार गलत ढलान वाली नालियां, बंद जल निकासी मार्ग और अतिक्रमण इस समस्या के प्रमुख कारण हैं।
संस्था ने मानसून से पहले सीवर लाइनों की व्यापक सफाई और निरीक्षण की भी मांग की है। उनका कहना है कि बरसात के दौरान सीवरों के रिवर्स फ्लो और ओवरफ्लो होने से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे उत्पन्न होते हैं।
CONRWA ने प्राधिकरण से मांग की है कि जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए तकनीकी सर्वेक्षण कर दीर्घकालिक योजना बनाई जाए तथा इस संबंध में की गई कार्रवाई से संगठन को भी अवगत कराया जाए।



