नोएडा से मुंबई एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी की मांग तेज, CONRWA ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को भेजा पत्र

ग्रेटर नोएडा: एनसीआर की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाली ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित इंटरचेंज परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। निर्माण कार्य 30 सितंबर तक पूरा होने की संभावना है, जबकि 15 अक्टूबर 2026 से इस इंटरचेंज को वाहनों की आवाजाही के लिए खोलने की तैयारी है। इसके शुरू होने से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) तक पहुंच पहले से कहीं अधिक तेज और आसान हो जाएगी।
जगनपुर अफजलपुर के पास बन रहे इस आधुनिक इंटरचेंज का हाल ही में एनएचएआई चेयरमैन संतोष यादव ने निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्य समयबद्ध और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। परियोजना में सड़क सुरक्षा, ड्रेनेज, लैंडस्केपिंग और हरियाली पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
इस इंटरचेंज के शुरू होने के बाद हरियाणा, गाजियाबाद, बागपत, सोनीपत, पलवल, फरीदाबाद और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आने वाले यात्रियों को नोएडा और ग्रेटर नोएडा शहर के अंदर से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे यात्रा का समय कम होगा, ईंधन की बचत होगी और दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक जाम में भी राहत मिलने की उम्मीद है।
करीब 83 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित हो रही इस परियोजना में 4 एंट्री, 4 एग्जिट, 4 बड़े लूप, 8 आधुनिक रैंप, 13.308 किलोमीटर लंबा रैंप नेटवर्क और 8 अंडरपास बनाए जा रहे हैं। साथ ही इसे यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) की 60 मीटर चौड़ी सड़क से भी जोड़ा जा रहा है, जिससे यीडा के सेक्टरों, औद्योगिक क्षेत्रों और भविष्य की स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को सीधा लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन के साथ यह इंटरचेंज क्षेत्र के औद्योगिक विकास, लॉजिस्टिक्स, निवेश और रोजगार को नई गति देगा तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर की परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।



