Noida: सीआईटीयू का बड़ा ऐलान, सभी वामदलों का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, नोएडा हिंसा के बाद लिया फैसला
सीआईटीयू के जिला सचिव कामरेड गंगेश्वर दत्त शर्मा को 9 अप्रैल की देर रात से घर में ही नज़रबंद कर दिया गया था। उनका मोबाइल भी पुलिस ने जब्त कर लिया था।

नोएडा में श्रमिकों हिंसा को सीआईटीयू के पदाधिकारियों ने दमन और सीटू नेताओं की नज़रबंदी का आरोप लगाया है। विरोध में सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस(सीआईटीयू) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि
शासन-प्रशासन की दमनकारी नीतियों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भंडाफोड़ किया जाएगा। इसकी शिकायत अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन से भी करेंगे।
सीआईटीयू की जिला कमेटी के मुताबिक, नोएडा में 12 साल से न्यूनतम वेतन नहीं बढ़ाया गया है। श्रम कानूनों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। अपनी नाकामी छुपाने के लिए सरकार विपक्ष की साजिश और पाकिस्तान कनेक्शन जैसे आरोप लगाकर श्रमिकों को मुद्दों से ध्यान भटका रही है।
सीआईटीयू के जिला सचिव कामरेड गंगेश्वर दत्त शर्मा को 9 अप्रैल की देर रात से घर में ही नज़रबंद कर दिया गया था। उनका मोबाइल भी पुलिस ने जब्त कर लिया था। सीपीएम के सांसद व राष्ट्रीय महासचिव के पत्र और न्यायालय के ‘कारण बताओ नोटिस’ के बावजूद जिला प्रशासन ने उन्हें रिहा नहीं किया। बढ़ते दबाव के बाद पुलिस ने उन्हें रिहा कर मोबाइल वापस किया। इसके बाद डीएम कार्यालय पर प्रस्तावित धरना प्रदर्शन फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
CITU की प्रमुख मांगें
सीआईटीयू ने मजदूरों की बिना शर्त रिहाई, फर्जी मुकदमे वापस, ट्रेड यूनियन अधिकार के बहाल करने, 26,000 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन लागू करने, जेल में बंद मजदूरों को युद्ध स्तर पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। इन सभी मुद्दों पर नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर CPI, CPI(M), CPI(ML), RSP, Forward Bloc, CGPI समेत सभी वाम दल शामिल होंगे।




