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जहर खाकर जान देने जा रहे 90 लोगों की बची जान, एंबुलेंस सेवा बनी फरिश्ता

नोएडा: गौतमबुद्ध नगर जिले में पिछले छह महीनों में करीब 90 ऐसे लोगों की जान बचाई गई, जो पारिवारिक झगड़े, तनाव या आर्थिक दबाव के कारण जहर खाकर आत्महत्या करने जा रहे थे।

समय पर मिली एंबुलेंस सेवा और स्टाफ की तत्परता ने न केवल उनकी जान बचाई, बल्कि उनके परिवारों को भी टूटने से बचा लिया।

लखनऊ से एंबुलेंस स्टाफ को मिली सराहना

स्वास्थ्य विभाग के लखनऊ स्थित उच्च अधिकारियों ने गौतमबुद्ध नगर के एंबुलेंस कर्मियों की इस संवेदनशील सेवा के लिए बधाई और शुभकामनाएं भेजी हैं। उन्होंने मानवता के इस कार्य के लिए पूरे जिले के स्टाफ की सराहना की है।

2024 में 180 जहर खाने की सूचनाएं, 175 की बची जान

वर्ष 2024 में कंट्रोल रूम पर जहर खाने के 180 मामलों की सूचना मिली थी, जिनमें से 175 लोगों को समय रहते अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाई गई। यह मुमकिन हो पाया स्वास्थ्य विभाग की तेज और संवेदनशील एंबुलेंस टीम के कारण।

कहां-कहां तैनात हैं एंबुलेंस

जिले को 108 सेवा की 14 और 102 सेवा की 17 एंबुलेंस मिली हुई हैं। इन्हें विभिन्न स्थानों जैसे जिला अस्पताल, जेवर, दादरी, डाढा, बादलपुर, बिसरख, भंगेल और एक्सप्रेसवे पर तैनात किया गया है। एंबुलेंस तैनाती की जिम्मेदारी जनपद प्रभारी जितेंद्र शिशोदिया निभा रहे हैं।

गोल्डन ऑवर में पहुंचाई मदद

बीते छह महीनों में कंट्रोल रूम पर 10,000 से ज्यादा कॉल्स आईं, जिनमें से 90 मामले जहर खाने के थे। एंबुलेंस चालकों और स्टाफ ने अपनी जान की परवाह किए बिना गोल्डन समय (Golden Hour) में मरीजों को अस्पताल पहुंचाया, जिससे उनकी जान बचाई जा सकी।

फरवरी और अप्रैल में सबसे ज्यादा मामले

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी और अप्रैल महीने में आत्महत्या के सबसे ज्यादा मामले सामने आए। अधिकतर मामलों में घरेलू कलह, मानसिक तनाव और आर्थिक तंगी जैसी वजहें पाई गईं।

मनोचिकित्सकों ने की काउंसलिंग

जहर खाने वाले मरीजों को अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद मनोचिकित्सकों द्वारा काउंसलिंग दी गई और मानसिक स्थिति में सुधार होने के बाद उन्हें परिजनों के साथ घर भेज दिया गया।

सीएमओ बोले – संवेदनशीलता ही सबसे बड़ी सेवा

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार का कहना है कि एंबुलेंस सेवा के स्टाफ को लगातार प्रेरित किया जाता है ताकि वे न केवल समय पर सेवा दें, बल्कि मानवता और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का पालन करें। गर्भवती महिलाओं, हृदय रोगियों और आत्महत्या के प्रयास करने वालों को भी समय पर इलाज मिल रहा है।

 

Divya Gupta

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