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निठारी कांड: सन्नाटे में दबे 19 मासूमों की चीखें

नोएडा : साल 2006 में नोएडा के निठारी गांव से जो खुलासा हुआ, उसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। एक के बाद एक बच्चों और लड़कियों के गायब होने और फिर उनके शवों के मिलने से हड़कंप मच गया। इस जघन्य अपराध में मुख्य रूप से दो नाम सामने आए—मनिंदर सिंह पंधेर और सुरेंद्र कोली।

सुराग बना मोबाइल, पुलिस चार दिन में पहुंची कोली तक

पूरे मामले की शुरुआत एक युवती पायल के गायब होने से हुई। जब पायल वापस नहीं लौटी तो पुलिस ने उसकी खोज शुरू की। पायल का मोबाइल बंद मिला लेकिन उसके IMEI नंबर से पुलिस जांच में जुट गई। फोन की लोकेशन बदलते हुए कई हाथों में गया—राजपाल, संजीव, एक रिक्शा चालक—और अंत में पुलिस सुरेंद्र कोली तक जा पहुंची।

कोली को उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित उसके गांव से गिरफ्तार किया गया।

कोठी से मिले सुराग, खुला मौत का दरवाजा

जांच के दौरान पुलिस को कोठी के भीतर पायल की चप्पल और अन्य सबूत मिले। पूछताछ में कोली और पंधेर को आमने-सामने बैठाया गया, जहां कोली ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। यह भी सामने आया कि कोली ने पायल के मोबाइल का इस्तेमाल अपने नाम से खरीदी गई सिम में किया था, जिससे जांच आगे बढ़ सकी।

जब खुला राज, तो उबल पड़ा जनाक्रोश

जैसे ही इस भयावह कांड का पर्दाफाश हुआ, लोगों में गुस्सा फूट पड़ा। निठारी के नाले नंबर-4 से 19 बच्चों और युवतियों के अवशेष मिलने की खबर ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। लोगों ने आरोपितों के लिए फांसी की मांग की।

न्याय की आस में थकी आंखें

हालांकि पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन आज भी यह सवाल खड़ा है कि क्या सभी हत्याओं का सच सामने आ पाया? एक ओर मनिंदर सिंह पंधेर पहले ही जेल से रिहा हो चुका है, तो दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को कुछ मामलों में राहत दी है।

अंत में…

पीड़ित परिवारों की आंखें अब भी इंसाफ की राह तक रही हैं। निठारी कांड सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि हमारी न्यायिक व्यवस्था और मानवता के सामने एक गंभीर सवाल बनकर खड़ा है।

 

 

Divya Gupta

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