बिहार SIR पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 48 घंटे में वेबसाइट पर हटाए गए मतदाताओं के नाम जारी करने का चुनाव आयोग को दिया आदेश

नोएडा: सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनकी पूरी सूची 48 घंटे के भीतर आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की जाए।
शीर्ष अदालत ने कहा कि यह कदम इसलिए जरूरी है ताकि प्रभावित नागरिक सीधे अपने लिए कार्रवाई कर सकें और उन्हें राजनीतिक दलों पर निर्भर न रहना पड़े। कोर्ट ने निर्वाचन आयोग की इस पहल की सराहना की कि एसआईआर के जरिए आप जमीनी स्तर तक पहुंच रहे हैं, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि पारदर्शिता के लिए नाम सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होना चाहिए।
निर्वाचन आयोग ने बताया कि यह सूची राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स को उपलब्ध करा दी गई है। इस पर कोर्ट ने कहा कि इसे वेबसाइट पर डालने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए, ताकि आम जनता सीधे जानकारी प्राप्त कर सके।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि मृत, स्थानांतरित या अन्य कारणों से हटाए गए मतदाताओं के नाम और कारण स्पष्ट रूप से सूची में दर्शाए जाएं। साथ ही, नोटिस में आधार और वोटर कार्ड जमा करने का विकल्प स्पष्ट रूप से दिया जाए, जिससे जिन लोगों ने दस्तावेज नहीं दिए हैं, वे तुरंत प्रक्रिया पूरी कर सकें।
जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया नागरिक-हितैषी और सरल होनी चाहिए। जिला स्तर पर भी यह जानकारी 48 घंटे के भीतर प्रकाशित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस मामले की अगली सुनवाई 22 अगस्त को होगी।




