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वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय पर एक और एफआईआर, सरकार की कार्यशैली पर उठे सवाल

लखनऊ: वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय पर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बार फिर एफआईआर दर्ज की है। यह तीसरी एफआईआर लखनऊ के हजरतगंज थाने में दर्ज कराई गई है। इस बार का “अपराध” यह है कि अभिषेक उपाध्याय ने गोरखपुर में पशु तस्करों के हमले में मारे गए 19 वर्षीय युवक दीपक गुप्ता की मौत से जुड़ी खबर को रिपोर्ट किया — वह खबर, जो तमाम मीडिया संस्थानों ने कवर की और जो मृतक के परिजनों ने स्वयं मीडिया के कैमरों के सामने रखी।
इस एफआईआर में अभिषेक उपाध्याय पर “दंगा भड़काने” जैसे संगीन आरोप लगाए गए हैं। यह स्थिति पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर एक सीधा हमला मानी जा रही है।
अभिषेक उपाध्याय ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सीधा सवाल किया है कि क्या सरकार कलम की ताकत से इतना डरने लगी है? क्या एक पत्रकार द्वारा जनहित में उठाए गए सवालों का जवाब एफआईआर के जरिए देना ही अब सत्ता की नीति बन चुकी है?
उन्होंने प्रेस और लोकतंत्र की स्वतंत्रता को दबाने के इन प्रयासों पर तीखा कटाक्ष किया है और योगी आदित्यनाथ को चुनौती दी है कि अगली एफआईआर अज्ञात के नाम पर नहीं, सीधे खुद के नाम से दर्ज कराएं।

Vishnu Pratap

मेरा नाम विष्णु प्रताप है। मेरा जन्म 18 मई 2004 को उत्तर प्रदेश के एटा जिले में हुआ। पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक करियर नहीं, बल्कि एक जुनून है। वर्तमान में मैं Federal Bharat News में रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हूं। मुझे अंतरराष्ट्रीय संबंध, इतिहास, राजनीति, युद्ध से जुड़ी खबरें, बिज़नेस और NGO से संबंधित विषयों में गहरी रुचि है। खाली समय में मुझे पढ़ना और अपने दोस्तों के साथ समय बिताना अच्छा लगता है।

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Vishnu Pratap

मेरा नाम विष्णु प्रताप है। मेरा जन्म 18 मई 2004 को उत्तर प्रदेश के एटा जिले में हुआ। पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक करियर नहीं, बल्कि एक जुनून है। वर्तमान में मैं Federal Bharat News में रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हूं। मुझे अंतरराष्ट्रीय संबंध, इतिहास, राजनीति, युद्ध से जुड़ी खबरें, बिज़नेस और NGO से संबंधित विषयों में गहरी रुचि है। खाली समय में मुझे पढ़ना और अपने दोस्तों के साथ समय बिताना अच्छा लगता है।

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