ट्रंप चाहते थे नोबेल शांति पुरस्कार 2025, लेकिन दुनिया ने चुनी मारिया कोरिना मचाडो!

दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक, नोबेल शांति पुरस्कार 2025 (Nobel Peace Prize 2025) की घोषणा हो गई है। इस वर्ष का नोबेल शांति पुरस्कार मारिया कोरिना मचाडो को प्रदान किया गया है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही मारिया कोरिना मचाडो दुनिया के प्रमुख शांति दूतों में शामिल हो गई हैं।
नोबेल समिति ने की घोषणा
नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा नोबेल समिति के अध्यक्ष जॉर्जेन वाटनर फ्राइडनेस ने की। समारोह में दुनिया भर के मीडिया कर्मियों की मौजूदगी रही। नोबेल समिति में अध्यक्ष के साथ चार अन्य सदस्य भी शामिल हैं:
- विदेश नीति विशेषज्ञ एस्ले टोजे
- नॉर्वे के पूर्व कार्यवाहक प्रधानमंत्री ऐनी एंगर
- पूर्व शिक्षा मंत्री क्रिस्टिन क्लेमेट
- नॉर्वेजियन विदेश मामलों के सचिव ग्रिलार्सन
उनके इस निर्णय ने शांति पुरस्कार को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया।
नोबेल शांति पुरस्कार का ऐतिहासिक महत्व
इतिहास में अमेरिका के चार राष्ट्रपति इस पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं।
- थियोडोर रूजवेल्ट (1906) – रूस–जापान युद्ध में मध्यस्थता के लिए
- वुडरो विल्सन (1919) – प्रथम विश्व युद्ध के बाद लीग ऑफ नेशन की स्थापना में योगदान के लिए
- जिमी कार्टर (2002) – अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान और मानवाधिकारों के लिए
- बराक ओबामा (2009) – अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति और सहयोग बढ़ाने में असाधारण प्रयासों के लिए
भारत के लिए अब तक केवल एक मूल निवासी नागरिक को नोबेल शांति पुरस्कार मिल चुका है – कैलाश सत्यार्थी (2014)। हालांकि मदर टेरेसा और दलाई लामा को भी भारत में किए गए कार्यों के लिए सम्मानित किया गया, वे मूल रूप से भारतीय नहीं थे।
मारिया कोरिना मचाडो की यह उपलब्धि न केवल उनके अथक प्रयासों को पहचान देती है, बल्कि वैश्विक शांति और मानवता के लिए उनके योगदान को भी सराहती है।




