नोएडा में बिल्डर का कारनामा — 26 मंजिल की मंजूरी, 29 मंजिल का निर्माण

नोएडा – नोएडा सेक्टर-90 स्थित अल्फाथंब परियोजना (AlphaThumb Project) में बिल्डर द्वारा भारी फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है।
खरीदारों का आरोप है कि सीबीएस इंटरनेशनल प्रोजेक्ट लिमिटेड ने 26 मंजिल की मंजूरी लेकर 29 मंजिला इमारत बना डाली। सबसे बड़ी बात यह है कि कब्जा भी मंजूर नक्शे से अलग जगह पर दिया जा रहा है, जिससे आवंटियों में गुस्सा और आक्रोश है।
मंजूरी सिर्फ 23 मंजिल की, बनी 29 मंजिल की इमारत
जानकारी के अनुसार, नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) ने वर्ष 2014 में कंपनी को केवल 23 मंजिल की इमारत की अनुमति दी थी।
बाद में 2017 में संशोधित प्लान के तहत 26 मंजिला बिल्डिंग की मंजूरी दी गई।
लेकिन मौके पर बिल्डर ने नियमों को धता बताते हुए 29 मंजिल का टॉवर खड़ा कर दिया।
खरीदार बोले—”नक्शे से अलग फ्लोर पर कब्जा, स्टांप ड्यूटी भी पूरी नहीं”
खरीदार सुम्बुल सिद्दिकी ने बताया कि बुकिंग के समय उन्हें अपर ग्राउंड फ्लोर को ग्राउंड फ्लोर बताया गया था।
अब बिल्डर उसी फ्लोर पर “अपर ग्राउंड” का बोर्ड लगाकर कब्जा देने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि न तो रजिस्ट्री पूरी हुई है, न ही स्टांप ड्यूटी का भुगतान किया गया है। खरीदारों ने इसे स्पष्ट धोखाधड़ी और विश्वासघात बताया है।
OC-CC के बाद भी गड़बड़ी पर सवाल
प्राधिकरण की ओर से Occupancy और Completion Certificate (OC-CC) जारी कर रजिस्ट्री की अनुमति भी दे दी गई।
हालांकि खरीदारों का कहना है कि प्रमाणपत्र मिलने के बाद भी नियमों की अनदेखी और अवैध निर्माण हुआ है।
इसी के चलते सेक्टर-142 थाना में बिल्डर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
जांच पर उठे सवाल, मिलीभगत का शक
खरीदारों ने प्राधिकरण में कई बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन बावजूद इसके बिल्डर को OC-CC मिल गया।
लोगों का कहना है कि नोएडा प्राधिकरण और बिल्डर के बीच मिलीभगत से ही यह घोटाला संभव हुआ है।
अब खरीदारों ने कड़ी कार्रवाई की मांग की है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की अपील की है।
बिल्डर का पक्ष — “सभी मंजूरियों के साथ निर्माण किया गया”
सीबीएस इंटरनेशनल प्रोजेक्ट लिमिटेड के निदेशक ईशान रस्तोगी ने सभी आरोपों से इनकार किया है।
उनका कहना है कि निर्माण कार्य पूरी तरह मंजूर प्लान के अनुसार हुआ है, और रेरा पोर्टल पर परियोजना की सभी जानकारी सार्वजनिक है।
उन्होंने कहा कि खरीदारों को उन्हीं स्थानों पर फ्लैट दिए जा रहे हैं, जहां उनकी बुकिंग की गई थी।
सोशल मीडिया पर बवाल, खरीदारों का समर्थन बढ़ा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है।
कई यूजर्स ने इसे “नोएडा का नया बिल्डर स्कैम” बताया और पारदर्शिता की मांग की।
#NoidaBuilderScam और #AlphaThumbFraud जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।




