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दिवाली धमाका! सुप्रीम कोर्ट ने दी ग्रीन पटाखों को हरी झंडी – अब मना सकेंगे ‘क्लीन दिवाली’!

सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहत, केवल ‘ग्रीन पटाखे’ के इस्तेमाल की मंजूरी, बिक्री और उपयोग पर जारी रहेंगे सख्त नियम

नई दिल्ली: दीवाली से पहले देश की राजधानी दिल्लीवासियों के लिए राहत की खबर आई है। सुप्रीम कोर्ट ने आज अपने आदेश में ग्रीन पटाखों (Green Crackers) के इस्तेमाल को अनुमति दी है। अदालत ने साफ किया है कि पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं है, लेकिन केवल पर्यावरण-अनुकूल यानी ‘ग्रीन पटाखे’ ही चलाए जा सकेंगे।

इस फैसले के बाद दिल्ली में कई महीनों से चली आ रही बहस पर विराम लग गया है। अदालत ने कहा कि वायु गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों का संतुलन जरूरी है। इसलिए ऐसे पटाखे जिनसे कम धुआं और प्रदूषण हो, उन्हें अनुमति दी जा सकती है।


क्या हैं ‘ग्रीन पटाखे’?

ग्रीन पटाखे ऐसे पटाखे होते हैं जिनमें सल्फर और नाइट्रेट जैसे हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। ये सामान्य पटाखों की तुलना में 30% तक कम प्रदूषण फैलाते हैं। इन्हें CSIR-NEERI (Council of Scientific and Industrial Research – National Environmental Engineering Research Institute) ने विकसित किया है।


सुप्रीम कोर्ट का आदेश क्या कहता है?

  • दिल्ली में सिर्फ प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति होगी।
  • बिक्री करने वालों को प्रमाणपत्र (AT Card) दिखाना होगा।
  • ऑनलाइन या ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर पटाखों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
  • अदालत ने राज्यों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को कड़ी निगरानी और रिपोर्टिंग के निर्देश दिए हैं।

दिल्ली सरकार का रुख

दिल्ली सरकार ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करेगी और केवल CSIR प्रमाणित ग्रीन पटाखों की सीमित बिक्री की अनुमति देगी। पर्यावरण विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

पर्यावरण मंत्री ने कहा —

“हम चाहते हैं कि लोग त्योहार मनाएं, लेकिन बिना प्रदूषण के। ग्रीन पटाखे इसका संतुलित समाधान हैं।”

जनता और बाजार की प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पटाखा व्यापारियों में उत्साह दिखा। कई व्यापारियों ने कहा कि इस फैसले से बाजार में रोजगार और बिक्री दोनों को राहत मिलेगी।
वहीं, पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस आदेश के साथ निगरानी तंत्र को मजबूत करना जरूरी है, ताकि सामान्य पटाखे फिर से बाजार में न लौट आएं।


त्योहारों में राहत लेकिन जिम्मेदारी भी

दिल्ली में दिवाली और छठ जैसे त्योहारों के समय वायु गुणवत्ता पहले ही खतरनाक स्तर तक पहुंच जाती है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश नागरिकों को ‘ग्रीन दिवाली’ मनाने की प्रेरणा देता है।

Vishnu Pratap

मेरा नाम विष्णु प्रताप है। मेरा जन्म 18 मई 2004 को उत्तर प्रदेश के एटा जिले में हुआ। पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक करियर नहीं, बल्कि एक जुनून है। वर्तमान में मैं Federal Bharat News में रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हूं। मुझे अंतरराष्ट्रीय संबंध, इतिहास, राजनीति, युद्ध से जुड़ी खबरें, बिज़नेस और NGO से संबंधित विषयों में गहरी रुचि है। खाली समय में मुझे पढ़ना और अपने दोस्तों के साथ समय बिताना अच्छा लगता है।

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मेरा नाम विष्णु प्रताप है। मेरा जन्म 18 मई 2004 को उत्तर प्रदेश के एटा जिले में हुआ। पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक करियर नहीं, बल्कि एक जुनून है। वर्तमान में मैं Federal Bharat News में रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हूं। मुझे अंतरराष्ट्रीय संबंध, इतिहास, राजनीति, युद्ध से जुड़ी खबरें, बिज़नेस और NGO से संबंधित विषयों में गहरी रुचि है। खाली समय में मुझे पढ़ना और अपने दोस्तों के साथ समय बिताना अच्छा लगता है।

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