पैरामाउंट बिल्डर ने सोसायटी में अवैध तरीके से किया नर्सिंग होम का निर्माण, विरोध में उतरे निवासी,, सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने से लोगों ने किया मना

ग्रेटर नोएडा : सोसायटी में अवैध तरीके से नर्सिंग होम का निर्माण अब बिल्डर के गले की हड्डी बन गया है..पैरामाउंट प्रोपबिल्ड प्रा. लि. द्वारा जारी किए गए सहमति पत्र” (Consent Letter) को लेकर सोसाइटी के निवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। निवासियों का आरोप है कि बिल्डर ने यूपीसीडा (UPSIDA) अधिकारियों की मिलीभगत से इस सहमति पत्र के माध्यम से अपने अवैध नर्सिंग होम के निर्माण और कानूनी मान्यता दिलाने का षड्यंत्र रचा है।
सोसाइटी निवासी पंकज शर्मा ने बताया कि बिल्डर ने स्वीकृत नक्शे (Approved Plan) से बड़े पैमाने पर विचलन (Deviation) किया है, जिसमें अवैध निर्माण कर एक नर्सिंग होम खोलने की तैयारी भी शामिल है। यह कार्यवाही न केवल सोसाइटी के नियोजन का उल्लंघन है, बल्कि RERA और UP Apartment Act के तहत निवासियों के अधिकारों का भी हनन है।
“सहमति पत्र” से कानूनी अधिकारों पर खतरा
निवासियों का कहना है कि बिल्डर द्वारा भेजे गए इस सहमति पत्र का उनकी रजिस्ट्री (Registry) से कोई संबंध नहीं है। इस पर हस्ताक्षर करने का अर्थ है — बिल्डर के सभी अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों को वैध ठहराना।
सोसाइटी के वरिष्ठ निवासी नंद किशोर जोशी ने बताया कि बिल्डर और UPSIDA की मिलीभगत के खिलाफ निवासियों ने संगठित होकर विरोध शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह सहमति पत्र हमारे कानूनी अधिकारों को खत्म करने की कोशिश है। हम किसी भी स्थिति में इस पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे और कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं।
बड़े पैमाने पर निर्माण और अनियमितता के आरोप
सूत्रों के अनुसार, सोसाइटी में कुल 1985 विला, 400 फ्लैट्स और एक कॉमर्शियल बिल्डिंग शामिल है। निवासियों का कहना है कि बिल्डर ने इन परिसरों में कई हिस्सों का उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए अवैध रूप से करने का प्रयास किया है।
निवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि बिल्डर ने बिना पूर्व लिखित सहमति के निर्माण में बदलाव किए, जो UP Apartment Act, 2010 की स्पष्ट अवहेलना है।
निवासियों ने की जांच और कार्रवाई की मांग
निवासियों ने यूपीसीडा के अधिकारियों और जिला प्रशासन से मांग की है कि वे पैरामाउंट प्रोपबिल्ड की परियोजना की स्वीकृत योजना, निर्माण विचलन, और सहमति पत्र प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच करवाएं।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि बिल्डर और अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो निवासी RERA और उच्च न्यायालय तक कानूनी कदम उठाने को बाध्य होंगे।




