दिल्ली धमाके के बाद यूपी में भी खुुफियां एजेंसियां अलर्ट, एटीएस ने भड़काऊ सामग्री छापने की जांच की तेज
यूपी एटीएस ने धार्मिक समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलाने के लिए विदेश से 11 करोड़ रुपए की फंडिंग जुटाने और बांग्लादेशी घुसपैठियों को पनाह देने के आरोप में दिल्ली निवासी फरहान नबी सिद्दीकी को शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा कासना एरिया से गिरफ्तार किया था।
दिल्ली में हुए कार धमाके के बाद भड़काऊ सामग्री छापने के मामले की जांच यूपी एटीएस ने तेज कर दी है। यूपी एटीएस ने धार्मिक समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलाने के लिए विदेश से 11 करोड़ रुपए की फंडिंग जुटाने और बांग्लादेशी घुसपैठियों को पनाह देने के आरोप में दिल्ली निवासी फरहान नबी सिद्दीकी को शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा कासना एरिया से गिरफ्तार किया था। अब दिल्ली में धमाके होने के बाद खुफिया विभाग भी अलर्ट हो गया है। जांच यह भी की जा रही है कि फरीदाबाद से भी तो इन आरोपियों के तार तो नहीं जुड़े है।
बता दें कि यूपी एटीएस ने धार्मिक समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलाने के लिए विदेश से 11 करोड़ रुपए की फंडिंग जुटाने और बांग्लादेशी घुसपैठियों को पनाह देने के आरोप में दिल्ली निवासी फरहान नबी सिद्दीकी को शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा कासना एरिया से गिरफ्तार किया था। वह भड़काऊ सामग्री वाली किताबों का प्रकाशन भी करता है और फंडिंग जुटाने वाली कंपनी इस्तानबुल इंटरनेशनल कंपनी का सह निदेशक है। इस रकम से यूपी के अमरोहा और पंजाब में मस्जिद और मदरसे बनाने के लिए जमीनों को खरीदा गया था। एटीएस के मुताबिक फरहान अपने साथी नासी तोर्बा के साथ मिलकर कई कंपनियों का संचालन करता है।
वह ग्रेटर नोएडा में भड़काऊ सामग्री वाली किताबों का प्रकाशन करने के साथ वितरित भी करा रहा था। वहीं तुर्की और जर्मनी से तमाम लोग आते थे, जिसकी सूचना पुलिस को नहीं दी जाती थी। उनकी कंपनियों में विदेश से हवाला एवं अन्य माध्यम से पैसा मंगाया जा रहा था। ये ग्रेटर नोएडा के कासना में हकीकत प्रिंटिंग पब्लिकेशन का इस्तेमाल धार्मिक एवं विभिन्न समूह के बीच शत्रुता एवं वैमनस्यता फैलाने वाली किताबों का प्रकाशन करने में कर रहे थे। वहीं, अब कासना थाना पुलिस ने भी इस मामले की जांच शुरू की है। पुलिस स्थानीय स्तर पर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है की कहानी इन लोगों ने मस्जिद या मदरसे के लिए तो जमीन नहीं खरीदी थी। किसी धार्मिक आयोजन में भी तो उन्होंने फंडिंग नहीं की थी।




