स्ट्रे एनिमल्स के अवैध उठाव पर संस्था का कड़ा विरोध, कड़े कानून की माँग तेज, प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया बड़ा एलान

ग्रेटर नोएडा : सक्षंय बब्बर टीम द्वारा 24 नवंबर 2025 को ग्रेटर नोएडा के स्वर्ण नगरी प्रेस क्लब में आयोजित होने वाली इस विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य देशभर में तेजी से बढ़ रही स्ट्रे एनिमल क्रूरता, गलत एवं भ्रामक डॉग बाइट–रेबीज़ डेटा, और सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेशों से उत्पन्न गंभीर जटिलताओं को समग्र रूप से देश के समक्ष प्रस्तुत करना है। संस्था का मानना है कि हाल के वर्षों में पशु क्रूरता के मामले चिंताजनक स्तर तक पहुँच चुके हैं, विशेष रूप से एसिड अटैक, रेप, टॉर्चर, हिट-एंड-रन तथा ज़हर देकर मारने जैसी घटनाओं में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इन जघन्य अपराधों की गंभीरता के बावजूद कई शहरों में एफआईआर दर्ज नहीं होती, और जहां दर्ज होती भी है, वहाँ अक्सर अपराधियों को मात्र ₹50 की जमानत पर छोड़ दिया जाता है, जिससे कानून की कमजोरी उजागर होती है और अपराधियों का मनोबल बढ़ता है। संस्था ने यह भी बताया कि 11 अगस्त के सुप्रीम कोर्ट आदेश के बाद देशभर में फीडर्स पर उत्पीड़न, धमकी, हिंसा और भेदभाव की घटनाएँ बढ़ी हैं, जबकि आदेश का वास्तविक अर्थ और उद्देश्य कई स्थानों पर गलत समझा जा रहा है।
इसी के साथ सोशल मीडिया और कुछ स्थानीय संगठनों द्वारा फैलाए जा रहे गलत डॉग-बाइट एवं रेबीज़ आंकड़ों ने जनता के मन में डर और अविश्वास को और अधिक बढ़ा दिया है। कई वायरल पोस्ट, वीडियो और डेटा पॉइंट्स बाद में गलत सिद्ध हुए हैं, जबकि सरकारी आंकड़े बताते हैं कि रेबीज़ और मानव-जानवर संघर्ष की असल स्थिति उतनी भयावह नहीं है जितनी सोशल मीडिया पर प्रस्तुत की जा रही है। यह गलत जानकारी न केवल जानवरों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देती है बल्कि समाज में अनावश्यक तनाव भी उत्पन्न करती है। संस्था ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पारित करते समय पशु कल्याण समूहों, विशेषज्ञ संस्थाओं और संबंधित हितधारकों को पर्याप्त रूप से नहीं सुना गया। इसके परिणामस्वरूप कई राज्यों और नगर निकायों ने आदेशों की गलत व्याख्या कर अवैध कुत्ता उठाव और स्ट्रे एनिमल्स पर अत्याचार की घटनाओं को और बढ़ावा दिया है, विशेषकर तब जब देशभर में पर्याप्त शेल्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशिक्षित स्टाफ की भारी कमी है। सभी कुत्तों को हटाने या उन्हें शेल्टर में रखने जैसे सुझाव व्यावहारिक रूप से असंभव हैं और इससे शहरों में अव्यवस्था, भय और व्यापक भ्रम फैल रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में संस्था दिल्ली, लखनऊ, गुजरात, फरीदाबाद और कई अन्य शहरों के केस स्टडी, वीडियो प्रमाण, शिकायत प्रतिलिपियाँ, मेडिकल रिकॉर्ड, डॉग-हेट कैंपेन के सबूत और रेबीज़ एवं दुर्घटनाओं से जुड़े तुलनात्मक आंकड़े पेश करेगी। यह सामग्री न केवल जमीनी हकीकत उजागर करेगी बल्कि यह भी बताएगी कि किस तरह गलत नीतियाँ और गलत सूचनाएँ दोनों तरफ—मानव और जानवर—के लिए खतरा बन रही हैं। इस संदर्भ में संस्था ने पांच प्रमुख समाधान प्रस्तुत किए हैं जिनमें रिफ्लेक्टिव कॉलर ड्राइव, वैज्ञानिक रूप से लागू ABC (एनिमल बर्थ कंट्रोल) प्रोग्राम, बड़े पैमाने पर एंटी-रेबीज़ टीकाकरण, शेल्टर-आधारित एडॉप्शन और करुणा-आधारित शिक्षा सुधार शामिल हैं।
इसके साथ ही संस्था ने चार मुख्य मांगें रखी हैं: सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए; जानवरों के लिए कड़े कानून बनाए जाएँ और उनका सख्त पालन हो; देशभर में पशु क्रूरता मामलों का राष्ट्रीय स्तर पर ऑडिट किया जाए; और नीति निर्माण में अंतरराष्ट्रीय वेलफेयर संस्थाओं एवं विशेषज्ञों को शामिल किया जाए ताकि फैसले वैज्ञानिक, मानवीय और व्यावहारिक आधार पर हों। संस्था का कहना है कि गलत नीतियों, गलत जानकारी और बढ़ती हिंसा के इस दौर में समाज को करुणा, विज्ञान और संवेदनशीलता की ओर लौटना होगा—और यह प्रेस कॉन्फ्रेंस उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।




