Greater Noida: हादसे में इलेक्ट्रिशियन ने गंवाया अंगूठा, फिर डॉक्टरों ने की सफल सर्जरी
यथार्थ अस्पताल के डॉ. सौरभ गुप्ता ने बताया कि शरीर के किसी अंग के कट जाने की स्थिति में पहले छह घंटे को गोल्डन पीरियड माना जाता है। इसी दौरान माइक्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से कटे हुए अंग को सफलतापूर्वक जोड़ा जा सकता है।

ग्रेटर नोएडा के रहने वाले एक इलेक्ट्रिशियन का काम करने के दौरान मशीन हाथ से फिसलने से अंगूठा जड़ से कट गया। पूरी तरह से अलग हुए अंगूठे के साथ गंभीर हालत में मरीज कई अस्पतालों में इलाज के लिए गया, लेकिन केस की जटिलता के कारण इलाज से मना कर दिया गया। अब वह किसी परिचित की सलाह पर यथार्थ अस्पताल पहुंचे।
यथार्थ अस्पताल के डॉ. सौरभ गुप्ता ने बताया कि शरीर के किसी अंग के कट जाने की स्थिति में पहले छह घंटे को गोल्डन पीरियड माना जाता है। इसी दौरान माइक्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से कटे हुए अंग को सफलतापूर्वक जोड़ा जा सकता है। इस प्रक्रिया में बेहद बारीक नसों और रक्त वाहिकाओं को माइक्रोस्कोप की सहायता से खोजकर आपस में जोड़ा जाता है। उन्होंने बताया कि इस केस में सबसे बड़ी चुनौती कट चुके अंगूठे की नसों और रक्त वाहिकाओं को हाथ की नसों से इस प्रकार जोड़ना था, जिससे रक्त प्रवाह सामान्य रूप से बहाल हो सके। इस पूरी प्रक्रिया को माइक्रो सर्जिकल रिप्लांटेशन कहा जाता है।
मरीज की स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे बिना किसी देरी के तुरंत ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। डॉ. सौरभ के. गुप्ता, डॉ. ईदेन बिलाल सहित तीन प्लास्टिक सर्जनों की टीम ने लगभग 4.5 से 5 घंटे तक चली जटिल माइक्रो सर्जरी के बाद मरीज के अंगूठे को सफलतापूर्वक जोड़ दिया। फिलहाल मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और रिकवरी संतोषजनक है। मरीज ने सफल इलाज के लिए डॉक्टर्स का आभार व्यक्त किया।
डॉ. सौरभ ने कहा कि इस तरह की दुर्घटनाएं अक्सर हो जाती हैं, लेकिन यदि मरीज को सही समय पर उचित चिकित्सा सुविधा मिल जाए तो गंभीर चोट का भी सफल इलाज संभव है। माइक्रोस्कोपिक सर्जरी जैसी अत्याधुनिक सुविधा बहुत कम अस्पतालों में उपलब्ध है और यथार्थ हॉस्पिटल इस दिशा में लगातार सफल प्रयास कर रहा है।




