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Greater Noida: गेमिंग ऐप से खेला गया ठगी का घिनौना खेल, ‘मजाबुक’ और ‘मज़े से जीतो’ जैसी बातों में उलझाकर युवतियां करती थी जेब खाली

आरोपियों ने पुलिस और प्रशासन की नजरों से बचने के लिए गौर सिटी सेंटर में एक फर्जी ऑफिस बना रखा था, जिसका कोई कानूनी पंजीकरण या GST नंबर नहीं था।

सेंट्रल नोएडा के बिसरख कोतवाली पुलिस ने एक हाई-प्रोफाइल फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। ऑनलाइन गेमिंग ऐप के जरिए यह गिरोह लोगों के साथ ठगी किया करता था। पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से 18 मोबाइल फोन, चार लैपटॉप, 155 सिम, 50 क्यूआर कोड़, दो कप्यूटर मॉनीटर, चार वाई-फाई माडम, 10 पेज डाटाशीट, कॉलिंग हेडफोन और 45 हजार नगदी बरामद की है। गिरोह में शामिल पांच युवतियों ‘मजाबुक’ और ‘मज़े से जीतो’ जैसे ऐप्स के जरिए लोगों को अपनी बातों में फंसाकर उनका पैसा हड़प लेता था।

डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि तिलपता गांव के पास स्थित वंदना वाटिका निवासी गर्व पुत्र राजकुमार चौहान, नई दिल्ली निवासी 28 वर्षीय अजय सिहं पुत्र रामेश्वर सिहं, मध्यप्रदेश के जबलपुर निवासी 32 वर्षीय सोनल उर्फ अनिरुद्ध पुत्र राजेंद्र, रॉयल रेजिडेंसी निवासी 20 वर्षीय रुचि पुत्री अशोक, कानपुर निवासी 20 वर्षीय कोमल पुत्री सुनील, छपरौला के कुसुम गार्डन निवासी 21 वर्षीय सुषमा पुत्री दिलवर रावत, प्रताप विहार निवासी 20 वर्षीय तनीषा पुत्री विशाल और प्रतापगढ़ निवासी 23 वर्षीय सानिया सिंह पुत्री कमल प्रताप को गिरफ्तार किया है। डीसीपी सेंट्रल नोएडा के अनुसार, यह गिरोह ‘मजाबुक’ और ‘मज़े से जीतो’ नाम की वेबसाइट और ऐप के जरिए क्रिकेट, कसीनो और रोलेट जैसे खेलों पर सट्टा लगवाता था।

आरोपियों ने पुलिस और प्रशासन की नजरों से बचने के लिए गौर सिटी सेंटर में एक फर्जी ऑफिस बना रखा था, जिसका कोई कानूनी पंजीकरण या GST नंबर नहीं था। यह गिरोह ठगी का हाईटेक तरीका अपनाता और कंट्रोल अपने हाथ में रखते थे मास्टर माइंड अनिरुद्ध उन लोगों का डेटा निकालता था जो ऑनलाइन गेम में रुचि रखते थे। कॉल सेंटर में तैनात युवतियां लोगों को कॉल और मैसेज कर ज्यादा मुनाफे का लालच देती थीं। शुरुआत में ग्राहकों को फंसाने के लिए 1500 रुपये का फ्री बोनस दिया जाता था। विश्वास जीतने के लिए पहले छोटी-छोटी राशि जितवाई जाती थी।

कंट्रोल रूम से हार-जीत

गेम का पूरा कंट्रोल ठगों के पास होता था। जैसे ही कोई व्यक्ति बड़ी रकम लगाता, उसे जानबूझकर हरवा दिया जाता था। यदि कोई गलती से जीत जाता और पैसे निकालने की कोशिश करता, तो आरोपी उसे तुरंत ब्लॉक कर देते थे।पुलिस ने पकड़े गए सभी बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही, उन लोगों की भी जांच की जा रही है जिनके दस्तावेजों पर ये सिम कार्ड जारी हुए थे। पुलिस अब इस सिंडिकेट के ‘मनी ट्रेल’ (पैसों के लेनदेन) की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ठगी की रकम कहाँ-कहाँ भेजी गई है।

 

Aashish Gupta

आशीष गुप्ता ने जागरण इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया है और राजनीतिक विज्ञान में MA करने के बाद वह राष्ट्रीय सहारा, दैनिक जागरण जैसे देश के प्रमुख समाचार संस्थानों में कार्यरत रहे। 2015 में पीआर कंपनी मेक यू बिग मीडिया प्राइवेट की स्थापना करने के बाद 2021 में फ़ेडरल भारत की शुरुआत की।

Aashish Gupta

आशीष गुप्ता ने जागरण इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता का डिप्लोमा किया है और राजनीतिक विज्ञान में MA करने के बाद वह राष्ट्रीय सहारा, दैनिक जागरण जैसे देश के प्रमुख समाचार संस्थानों में कार्यरत रहे। 2015 में पीआर कंपनी मेक यू बिग मीडिया प्राइवेट की स्थापना करने के बाद 2021 में फ़ेडरल भारत की शुरुआत की।

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