Greater Noida: बदलती लाइफस्टाइल में लोग दिमागी रुप से भी हो रहे कमजोर, स्वास्थ विभाग के चौंकाने वाले हैं आंकड़े
जिला अस्पताल में विशेष मेडिकल बोर्ड की बैठक होती है। जिसमें हर सोमवार को विकलांगता प्रमाण पत्र जारी किए जाते है। अस्पताल में मिलने वाले आवेदन की जांच के बाद विकलांगता का प्रतिशत तय किया जाता है।
जिले में लोग मानसिक बीमारी से भी ग्रस्त हो रहे है। बदलती लाइफस्टाइल केवल शरीर ही नहीं, बल्कि दिमाग पर भी असर डाल रही है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों से इसका अदाजा लगाया जा सकता है। विकलांगता प्रमाण पत्रों के बढ़ते आंकड़े कही न कही परेशानी का सबब बन रहे है। बौद्धिक अक्षमता (इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी) के मामले बढ़ रहे है।
जिला अस्पताल में विशेष मेडिकल बोर्ड की बैठक होती है। जिसमें हर सोमवार को विकलांगता प्रमाण पत्र जारी किए जाते है। अस्पताल में मिलने वाले आवेदन की जांच के बाद विकलांगता का प्रतिशत तय किया जाता है। प्रमाण पत्र मिलने से दिव्यांगों को सरकारी योजनाओं, शिक्षा, रोजगार और अन्य सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने में मदद मिलती है।
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में बौद्धिक अक्षमता के 186 प्रमाण पत्र जारी किए गए, जबकि 2024 में यह संख्या 112 थी। इससे पहले 2023 में करीब 160 बौद्धिक अक्षमता के प्रमाण पत्र बनाए गए थे। बौद्धिक अक्षमता एक स्थिति होती है, जिसमें व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता सीमित हो जाती है और स्वतंत्र रूप से जीवन जीने की क्षमता प्रभावित होती है। इसके लक्षण अक्सर बचपन में ही दिखाई देने लगते हैं।
लोकोमोटर विकलांगता वह स्थिति है, जिसमें हड्डियों, जोड़ों, मांसपेशियों या तंत्रिका तंत्र में समस्या के कारण शरीर की गतिशीलता प्रभावित होती है। लो विजन से संबंधित विकलांगता प्रमाण पत्रों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सर्टिफिकेट का आंकड़ा –
वर्ष 2023 2024 2025
बौद्धिक अक्षमता 160 112 186
लोकोमोटर डिसेबिलिटी 437 320 511
कुल सर्टिफिकेट 1042 1042 1189




