Greater Noida: सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत मामले में तीन की बढ़ी न्यायिक हिरासत, पुलिस को भी लगाई फटकार
अदालत को बताया गया कि कंपनी की ओर से लगभग 500 पेज की विस्तृत रिपोर्ट पेश की गई है, जिसमें घटनास्थल से जुड़ी तकनीकी जानकारियां, जीपीएस युक्त सैटेलाइट इमेज और पुराने रिकॉर्ड शामिल हैं।

जिला न्यायालय ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत मामले में मंगलवार को लोटस ग्रीन बिल्डर से जुड़े दो आरोपी रवि बंसल और सचिन करनवाल की न्यायिक 29 जनवरी तक बढ़ा दी। साथ ही एमजेड विजटाउन के डायरेक्टर अभय कुमार की दो फरवरी तक न्यायिक हिरासत बढ़ा दी है। न्यायालय ने केस के जांच कर रहे विवेचक को भी कड़ी फटकार भी लगाई।
बता दें कि, सेक्टर—150 में हुए बिल्डर के निर्माणधाीन प्रोजेक्ट के लिए खोदे जा रहे बेसमेंट में इंजीनियर युवराज की कार गिरने से मौत हो गई थी। इस मामले में तीन को पुलिस ने जेल भेजा था। इस मामले में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने विवेचक को पूरी तैयारी के साथ न्यायालय में पेश होने का आदेश दिया है। केस से जुड़ी फाइलें, दस्तावेजों की पूरी जानकारी के अलावा तथ्यों के साथ उपस्थित होना का आदेश दिया है। साथ ही पुलिस को अभी तक की गई जांच रिपोर्ट भी दो दिन में पूरी देनी होगी।लोटस ग्रीन बिल्डर के अधिवक्ताओं ने न्यायायल को बताया है कि गिरफ्तार किए गए दोनों ही डाईरेक्टर अपनी तरफ से कोई फैसला लेने में सक्षम नहीं है। दोनों वेतनभोगी कर्मचारी हैं। साथ ही उन्होंने दलील दी कि पुलिस ने जल्दबाजी में दबाव में आकर उनकी गिरफ्तारी की। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के दिशा—निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
अदालत को बताया गया कि कंपनी की ओर से लगभग 500 पेज की विस्तृत रिपोर्ट पेश की गई है, जिसमें घटनास्थल से जुड़ी तकनीकी जानकारियां, जीपीएस युक्त सैटेलाइट इमेज और पुराने रिकॉर्ड शामिल हैं। अधिवक्ताओं का कहना था कि वर्ष 2021 में जिस नाले के टूटने की बात सामने आई, उसी समय से वहां पानी भरने की स्थिति बनी हुई थी। इस संबंध में नोएडा प्राधिकरण को पूर्व में ही सूचना दी गई थी और मरम्मत के लिए फंड भी स्वीकृत हुआ था, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्य नहीं कराया गया। ऐसे में पूरे मामले की जिम्मेदारी केवल छोटे कर्मचारियों पर डालना न्यायसंगत नहीं है।
रिमांड पर बहस के दौरान बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि पुलिस ने न तो आरोपियों की भूमिका का स्पष्ट आकलन किया और न ही यह बताया कि किस आधार पर उन्हें सीधे जेल भेजा गया। बड़े बिल्डर, कंपनी के मालिक और शीर्ष पदों पर बैठे लोग अब भी गिरफ्तारी से बाहर हैं, जबकि निचले स्तर के कर्मचारियों को ही आरोपी बनाकर जेल में डाला गया है। इसलिए रिमांड निरस्त कर नियमित जमानत देने की मांग की गई।




