Noida: वेतन बढ़ोतरी के बाद भी क्यों भड़की हिंसा, दिल्ली से सटे गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में सबसे ज्यादा मिलेगी सैलरी
जनपद में औद्योगिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास करने वाले असामाजिक एवं बाहरी तत्वों के विरुद्ध प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।

नोएडा में सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर श्रमिकों ने वेतन बढ़ोतरी होने के बाद भी प्रदर्शन किया। सड़कों पर उतरे श्रमिकों से पुलिस की झड़प हो गई। भीड़ ने 2–3 जगहों पर पुलिस की गाड़ियों पर पथराव किया। कुछ ही देर में पुलिस ने हालात पर काबू पा लिया। प्रदर्शनकारियों को वहां से खदेड़ दिया। अब तक 300 से अधिक गिरफ्तारियां की गई हैं। अफवाह फैलाने वाले कुछ ग्रुप आइडेंटिफाई किए गए हैं। कुछ ऐसे लोग हैं, जो अलग-अलग जगहों पर भी पाए गए हैं। 50 एक्स हैंडल के जरिए हिंसा के लिए उकसाया गया।
गठित उच्च स्तरीय समिति ने श्रमिकों के बढ़ाए गए वेतन बढ़ोतरी की मंगलवार को घोषणा कर दी है। औद्योगिक विकास आयुक्त उत्तर प्रदेश दीपक कुमार ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में सबसे अधिक 21 प्रतिशत वेतन बढ़ाया गया है, जोकि एक अप्रैल से प्रभावी होंगी। अंतरिम वेतन वृद्धि के अनुसार अकुशल श्रमिकों का वेतन 11313 से बढ़ाकर 13690 कर दिया गया है, अर्धकुशल श्रमिकों का वेतन 12445 से बढ़ाकर 15059 किया गया है, जबकि कुशल श्रमिकों का वेतन 13940 से बढ़ाकर 16868 कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि अन्य नगर निगम वाले जनपदों के लिए अकुशल श्रमिकों का वेतन 11313 से बढ़ाकर 13006, अर्ध कुशल श्रमिकों का वेतन 12445 से बढ़ाकर 14306 तथा कुशल श्रमिकों का वेतन 13940 से बढ़ाकर 16025 कर दिया गया है।
इस अवसर पर समिति के सदस्य प्रमुख सचिव (श्रम) उत्तर प्रदेश डाॅ. एमकेएस सुंदरम, अपर मुख्य सचिव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), निर्यात प्रोत्साहन, खादी और ग्रामोद्योग विभाग उत्तर प्रदेश आलोक कुमार एवं सदस्य सचिव श्रम आयुक्त उत्तर प्रदेश मार्कण्डेय शाही, मुख्य कार्यपालक अधिकारी यमुना विकास प्राधिकरण राकेश कुमार सिंह, जिलाधिकारी मेधा रूपम मौजूद रही।
उन्होंने बताया कि सोमवार को हुए प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर हुई हिंसात्मक घटनाओं का संज्ञान में आने पर उच्च स्तरीय समिति का गठन किया। समिति ने पूरे प्रकरण की जांच की गई तो सामने आया है कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर 20 हजार मासिक न्यूनतम वेतन लागू होने संबंधी खबरें पूरी तरह भ्रामक एवं निराधार हैं। जबकि भारत सरकार द्वारा नई श्रम संहिताओं के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर ‘फ्लोर वेज’ निर्धारित करने की प्रक्रिया प्रगति पर है, जिसका उद्देश्य देशभर के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन की एक समान आधार रेखा सुनिश्चित करना है।


