खिलौनों में लगी बटन बैटरी बनी जानलेवा, यथार्थ हॉस्पिटल ने 10 माह के मासूम की बचाई जान

नोएडा – खिलौनों, छोटी गाड़ियों, घड़ियों और रिमोट में इस्तेमाल होने वाली बटन बैटरियां बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। ऐसा ही एक मामला नोएडा के सेक्टर-110 स्थित यथार्थ सुपर Speciality हॉस्पिटल में सामने आया, जहां 10 माह के मासूम युवराज की जान डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर बचाई।
जानकारी के अनुसार, मास्टर युवराज को लगातार खांसी और दूध पीते समय सांस रुकने जैसी समस्या होने पर अस्पताल लाया गया। जांच में उसकी भोजन नली में एक बटन बैटरी फंसी हुई मिली। आपातकालीन एंडोस्कोपी के दौरान चिकित्सकों ने बैटरी को निकाल दिया, लेकिन तब तक उसके रासायनिक प्रभाव से भोजन नली (इसोफेगस) और श्वासनली (ट्रेकिया) को गंभीर नुकसान पहुंच चुका था।
डॉक्टरों ने बताया कि बैटरी की वजह से भोजन नली और श्वासनली के बीच असामान्य मार्ग बन गया था, जिससे बच्चे को बार-बार निमोनिया और अन्य जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा था। प्रारंभिक उपचार और करीब दो महीने तक निगरानी के बावजूद स्थिति में पूरी तरह सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद पुनर्निर्माण (रिकंस्ट्रक्टिव) सर्जरी का फैसला लिया गया।
करीब तीन घंटे तक चली इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी का नेतृत्व वरिष्ठ पीडियाट्रिक सर्जन Dr. Jai Bharat Panwar ने किया। सर्जरी के दौरान भोजन नली को श्वासनली से अलग कर दोनों क्षतिग्रस्त संरचनाओं की सफलतापूर्वक मरम्मत की गई।
सर्जरी के बाद बच्चे की हालत में लगातार सुधार हुआ और आवश्यक देखभाल के बाद उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वर्तमान में बच्चा सामान्य रूप से भोजन कर रहा है और तेजी से स्वस्थ हो रहा है।
डॉ. जय भारत पंवार ने कहा कि बटन बैटरी निगलना बच्चों में होने वाली सबसे खतरनाक आपातकालीन स्थितियों में से एक है। यह कुछ ही घंटों में भोजन नली और आसपास के ऊतकों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बटन बैटरियों को बच्चों की पहुंच से दूर रखें और निगलने की आशंका होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
वहीं, बच्चे के पिता ने अस्पताल और डॉक्टरों की टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी विशेषज्ञता और समर्पण की बदौलत उनके बच्चे को नया जीवन मिला है।
विशेषज्ञों के अनुसार, खिलौनों, घड़ियों, रिमोट, कैलकुलेटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपयोग होने वाली बटन बैटरियां बच्चों के लिए बेहद खतरनाक हो सकती हैं। इन्हें निगलने पर गंभीर जलन, ऊतकों को नुकसान, छिद्र और जानलेवा जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए अभिभावकों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।




