Noida: जारचा में हुए जमीन बेचने के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी में बड़ा खुलासा, सरकारी दफ्तर में रखी गई थी फर्जीवाड़े की नींव
जिन जमीनों के असली मालिक बाहर रहते थे, उनके नकली कागजात तैयार कराए जाते थे।

जारचा कोतवाली क्षेत्र में जमीन के नाम पर हुई करोड़ों की धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने गाजियाबाद से एक आरोपी गिरफ्तार किया है। इससे पहले पुलिस आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जिनमें मुख्य सरगना भी शामिल है। पकड़ा गया आरोपी गाजियाबाद स्थित बीएसएनएल में तैनात था। यह भी फर्जी कागजात बनाने में माहिर है। आरोपी ने ही मेन सरगना का बीएसएनएल का फर्जी आईकार्ड बनाया था। वह जमीन खरीदारों को सरकारी कर्मचारी बताता था। सरकारी कर्मचारी होने की वजह से लोग विश्वास कर उनके झांसे में आ जाते थे। अभी पुलिस को इस गिरोह के 15 से अधिक आरोपियों की तलाश है।
ऐसे करते थे फर्जीवाड़ा
जिन जमीनों के असली मालिक बाहर रहते थे, उनके नकली कागजात तैयार कराए जाते थे। असली मालिक की पूरी जानकारी जुटाने के बाद उनके नाम से फर्जी आधार कार्ड, पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार किए जाते थे। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर गिरोह का कोई सदस्य खुद को जमीन का असली मालिक बताकर रजिस्ट्री कार्यालय में पेश होता था। उसके बाद जमीन की फर्जी रजिस्ट्री अपने या किसी साथी के नाम करा ली जाती थी। रजिस्ट्री होने के बाद उसी जमीन को किसी तीसरे व्यक्ति को बेच दिया जाता था और मोटी रकम वसूल ली जाती थी।
करोड़ों की ठगी
यह गिरोह दर्जनों फर्जी रजिस्ट्री कराकर करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है। आरोपी प्रदीप राणा और उसका भाई मुख्य आरोपी टीटू राणा पहले से ही कई गंभीर मामलों में वांछित रहे हैं। इनके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, गैंगस्टर एक्ट, धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने जैसे कई संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं।
जारचा पुलिस के मुताबिक, बुधवार को गिरफ्तार किए गए रमेश ने प्रदीप का फर्जी बीएसएनएल का आईकार्ड बनवाया था। गाजियाबाद स्थित बीएसएनएल के दफ्तर में जमीन की खरीद—फरोख्त के लिए बैठक होती थी। वहीं जमीन के नाम पर किए जाने वाले फर्जीवाड़े के दौरान पैसे लिए जाते थे।



