Noida: चर्चित निक्की भाटी हत्याकांड में मुख्य आरोपी पति विपिन को हाईकोर्ट से मिली जमानत, करीब 14 माह बाद आएगा बाहर
थाना कासना में दर्ज मुकदमे के अनुसार, निक्की की बहन कंचन ने आरोप लगाया था कि उसकी बहन को ससुराल पक्ष के लोगों ने जलाकर मार डाला।

निक्की हत्याकांड में मुख्य आरोपी और मृतका के पति विपिन भाटी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। न्यायमूर्ति समीर जैन ने छह अक्टूबर को विपिन की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। अदालत ने मामले में अस्पताल के डॉक्टर और नर्स के बयान, अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस तथ्य नहीं है, जिससे यह कहा जा सके कि आरोपी ने अपनी पत्नी को जलाया था। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत के दौरान की गई टिप्पणियों का मुकदमे की सुनवाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
थाना कासना में दर्ज मुकदमे के अनुसार, निक्की की बहन कंचन ने आरोप लगाया था कि उसकी बहन को ससुराल पक्ष के लोगों ने जलाकर मार डाला। जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि घटना के बाद निक्की को अस्पताल ले जाया गया था। वहां इलाज करने वाले डॉक्टर यासिर खान और नर्स कोमल बाजपेयी के बयानों के अनुसार, निक्की ने दुर्घटनावश जलने से चोट लगने की बात बताई थी। अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज में भी निक्की को पड़ोसी देवेंद्र, ससुराल पक्ष के लोगों और परिवार के सदस्यों के साथ अस्पताल लाए जाने का उल्लेख किया गया।
अदालत ने कहा कि डॉक्टर और नर्स के बयानों तथा अस्पताल की फुटेज को देखते हुए प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट नहीं होता कि निक्की को आरोपी ने जलाया था।
पांच साल के बेटे के बयान पर भी चर्चा
सुनवाई के दौरान निक्की के करीब पांच साल के बेटे के बयान का भी उल्लेख हुआ। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि बच्चे ने अपने बयान में पिता पर मां को जलाने का आरोप लगाया था। वहीं बचाव पक्ष ने कहा कि बच्चे का बयान घटना के करीब दो महीने बाद दर्ज किया गया था और उसकी उम्र कम थी।
एक साल से अधिक समय से जेल में था आरोपी
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि विपिन 24 अगस्त 2025 से जेल में बंद था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस के रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने उसकी जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। अदालत ने आदेश दिया कि विपिन संबंधित अदालत की संतुष्टि के अनुसार व्यक्तिगत मुचलका और दो जमानतदार प्रस्तुत करने पर रिहा किया जा सकता है। उसे सुनवाई की तारीखों पर अदालत में उपस्थित रहने, गवाहों को प्रभावित नहीं करने और किसी आपराधिक या असामाजिक गतिविधि में शामिल नहीं होने की शर्तों का पालन करना होगा।




