निजी स्कूलों की फीस पर सख्ती की मांग, CONRWA अध्यक्ष डॉ. पी.एस. जैन ने सरकार को भेजा ज्ञापन

नोएडा – नोएडा की संस्था CONRWA ने देशभर में निजी स्कूलों द्वारा वसूली जा रही अत्यधिक फीस और अभिभावकों के कथित शोषण को लेकर प्रधानमंत्री Narendra Modi को ज्ञापन भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। संस्था ने कहा कि निजी स्कूलों की बढ़ती फीस अब आम और मध्यम वर्गीय परिवारों की पहुंच से बाहर होती जा रही है।
संस्था के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता डॉ. पी.एस. जैन ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि कई निजी स्कूल ट्यूशन फीस के अलावा एडमिशन फीस, वार्षिक शुल्क और अन्य नामों से मनमानी रकम वसूल रहे हैं। साथ ही अभिभावकों को स्कूल द्वारा अधिकृत दुकानों से ही किताबें, कॉपियां और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है।
ज्ञापन में विशेष रूप से नोएडा के विभिन्न स्कूलों द्वारा हाल ही में की गई फीस वृद्धि का भी उल्लेख किया गया है। संस्था ने कहा कि शिक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार है, लेकिन अत्यधिक शुल्क के कारण आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्ग के बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।
CONRWA ने बड़े कॉरपोरेट घरानों के CSR फंड के उपयोग पर भी सवाल उठाए हैं। संस्था का कहना है कि कई औद्योगिक समूह अपने ट्रस्ट बनाकर उन्हीं के माध्यम से महंगे कॉरपोरेट स्कूल संचालित कर रहे हैं, जहां मासिक फीस 50 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक है। इससे CSR का वास्तविक लाभ निम्न आय वर्ग तक नहीं पहुंच पा रहा।
संस्था ने केंद्र सरकार के सामने कई सुझाव रखे हैं, जिनमें देशभर के निजी स्कूलों के लिए अधिकतम मासिक फीस 5000 रुपये निर्धारित करने, फीस वृद्धि पर सख्त निगरानी, यूनिफॉर्म एवं किताबों की खरीद में अभिभावकों को स्वतंत्रता देने और CSR फंड के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग शामिल है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि निजी स्कूल इन नियमों का पालन करने में असमर्थ या अनिच्छुक हों, तो उनके राष्ट्रीयकरण पर विचार किया जाए ताकि सभी बच्चों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।
इस ज्ञापन की प्रतिलिपि योगी आदित्यनाथ और गौतमबुद्ध नगर के जिला अधिकारी को भी भेजी गई है।




