Noida: केरला लॉटरी का बड़ा झांसा, करोड़ों की ठगी करने वाले 10 गिरफ्तार, कनार्टक और आंध्रप्रदेश के लोग टारगेट
सेक्टर-121 के साई प्रॉपर्टी के पास फ्लैट-302 से गिरफ्तार किए गए आरोपी नोएडा में बैठकर कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के लोगों के साथ ठगी कर रहे थे।

फेस-3 कोतवाली पुलिस ने सेक्टर-121 में किराए के फ्लैट से संचालित साइबर ठगी का पर्दाफाश किया है। गिरोह के दस आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए पुलिस ने उनके कब्जे से 20 मोबाइल फोन, चार डेबिट कार्ड और 10200 रुपये बरामद किए है। यह गिरोह केरला लॉटरी के नाम पर फेसबुक एवं इंस्टाग्राम के जरिए लोगों को 12 लाख जीतने का झांसा देता था। उसके बाद 50 हजार से दो लाख रुपये तक की ठगी कर लिया करता था। अभी तक करोड़ों की ठगी करने का मामला सामने आया आ रहा है।
सेक्टर-121 के साई प्रॉपर्टी के पास फ्लैट-302 से गिरफ्तार किए गए आरोपी नोएडा में बैठकर कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के लोगों के साथ ठगी कर रहे थे। ठगी के लिए फर्जी इनकम टैक्स विभाग और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्रमाण पत्र तैयार कर व्हाट्सएप पर भेजे जाते थे। इस काम में इस्तेमाल होने वाले फर्जी बैंक खाते और सिम कार्ड गिरोह के सरगना की तरफ से उपलब्ध कराए जाते थे, जोकि अभी पुलिस की गिरफ्त से फरार है।
एडीसीपी स्वतंत्र सिंह ने बताया- दो महीनों में एनसीआरपी पोर्टल और समन्वय पोर्टल पर करीब 18 शिकायत मिली। शिकायत कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से थी, लेकिन जांच में सामने आया कि कॉल नोएडा से की जा रही थी। साइबर सेल सेक्टर-108 ने बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की पड़ताल की तो लाखों रुपए के ट्रांजैक्शन सामने आए। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी फर्जी बैंक खाते बदल-बदलकर इस्तेमाल करते थे और ठगी के बाद मोबाइल नंबर और सिम भी बदल देते थे।
एडीसीपी स्वतंत्र सिंह ने बताया कि बेंगलुरु निवासी एलन एंटनी पुत्र वीजे एंटनी, शकील पुत्र मइमुद्दीन, राजशेखर पुत्र मणिक्यम, गुरु प्रसाद पुत्र शिव शरण अप्पा, संतोष पुत्र मनोहर, चेतन पुत्र शांतइया, बिहार के नांलदा निवासी बीएससी पास अंकित कुमार पुत्र जयशंकर प्रसाद, राहुल पुत्र मनोज प्रसाद, कर्नाटक निवासी विनय डीपी और विनोद कुमार को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लॉटरी एवं इनाम जीतने का फर्जी विज्ञापन दिया जाता था। लॉटरी जीतने का झांसा देकर 50 रुपये में फर्जी लॉटरी टिकट बनाकर लोगों को भेज दिया करते थे। बाद में उन्हें 12 लाख रुपये की लॉटरी लगने का झांसा दिया जाता था।
टीडीएस, जीएसटी, एनओसी, इनकम टैक्स क्लीयरेंस, आरबीआई क्लीयरेंस एवं फाइनल ट्रांसफर चार्ज के नाम पर 50 हजार से दो लाख रुपये तक की ठगी कर लिया करते थे।



