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सावन सोमवार व्रत: कब, क्या खाएं और किन बातों से बचें? जानिए पूरी जानकारी

नोएडा: सावन का महीना शिवभक्तों के लिए सबसे खास माना जाता है। ये वही समय है जब भोलेनाथ अपने भक्तों की साधना और भक्ति से प्रसन्न होते हैं। खासतौर पर सावन के सोमवार—जिन्हें व्रत और उपवास के जरिए शिव को समर्पित किया जाता है।

लेकिन सिर्फ उपवास करना ही काफी नहीं होता, बल्कि व्रत के दौरान कुछ खास नियमों का पालन भी उतना ही जरूरी होता है।

अगर इन नियमों का उल्लंघन हो जाए, तो न सिर्फ व्रत का पुण्य कम हो सकता है, बल्कि उसका पूरा फल भी नहीं मिल पाता।

व्रत में इन चीज़ों का सेवन न करें

 1. गेहूं या चावल जैसे अनाज

कई लोग भूलवश गेहूं या चावल से बनी चीजें खा लेते हैं, लेकिन सावन सोमवार व्रत में अन्न का सेवन वर्जित माना गया है।

अगर आप एक समय भोजन करते हैं, तो वह शाम को करना चाहिए और उसमें सिर्फ फलाहारी चीज़ें होनी चाहिए।

क्या खाएं: सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा या साबूदाना से बनी चीजें।

2. तली-भुनी और पैकेट वाली चीजें

फ्राई चीजें, मखाने में मसाले, नमकीन और रेडी-टू-ईट स्नैक्स व्रत की शुद्धता को भंग कर सकते हैं।

भूलकर भी बाजार की नमकीन या मसालेदार चीज़ें न खाएं।

3. धूम्रपान और तंबाकू

सिगरेट, बीड़ी, गुटखा या तंबाकू जैसे नशे के पदार्थ न केवल व्रत को अपवित्र करते हैं, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी अक्षम्य माने जाते हैं।

व्रत का मूल उद्देश्य है — तन और मन दोनों की पवित्रता।

4. बाहर की मिठाई या पकवान

बाजार से लाई गई मिठाइयों या दूध से बनी चीजों की शुद्धता की कोई गारंटी नहीं होती। इसलिए इन्हें व्रत में खाना सही नहीं माना जाता।

घर पर बनी सात्विक मिठाइयों को प्राथमिकता दें।

 5. सादा नमक

सामान्य नमक व्रत में वर्जित होता है क्योंकि उसमें आयोडीन और अन्य रसायन होते हैं।

व्रत में केवल ‘सेंधा नमक’ (लाहौरी नमक) का उपयोग करें।

व्रत में क्या खाएं?

 1. सात्विक और फलाहारी भोजन

सावन सोमवार व्रत में आप फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े और कुट्टू के आटे से बनी चीजें खा सकते हैं। ये न केवल सात्विक हैं, बल्कि शिवजी को भी अर्पित किए जाते हैं।

ये शरीर को ऊर्जा देने के साथ थकान भी नहीं होने देते।

2. ताजे फल और मेवे

अनार, पपीता, केला, चीकू जैसे फल और काजू, किशमिश, पिस्ता, अखरोट जैसे सूखे मेवे व्रत में उपयुक्त हैं। ये स्वादिष्ट भी हैं और पोषण से भरपूर भी।

ध्यान रखें – व्रत सिर्फ शरीर को नहीं, आत्मा को भी शुद्ध करता है

व्रत का असली अर्थ सिर्फ खाना न खाना नहीं है — बल्कि खुद को अनुशासन और भक्ति के मार्ग पर लाना है।

जब हम श्रद्धा और संयम दोनों के साथ व्रत करते हैं, तभी हमें शिव की कृपा पूर्ण रूप से प्राप्त होती है।

 

 

Divya Gupta

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