Greater Noida: सेक्टरवासी बोले-दूषित पानी के लिए ग्रेनो प्राधिकरण जिम्मेदार, समय पर की जाती कार्रवाई तो नहीं आती समस्या
टीम अपने साथ पानी की जांच के लिए जरूरी उपकरण जैसे टीडीएस मीटर, पीएच व क्लोरीन किट साथ लेकर जा रही है। टीम को सप्लाई के पानी में ये सभी मानकों के अनुरूप ही मिले हैं।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की तरफ से एहतियात के तौर पर पानी की गुणवत्ता जांचने का अभियान तीसरे दिन भी जारी रहा। रविवार को 18 से अधिक सेक्टरों व गांव में 80 से ज्यादा जगहों से पानी की रैंडम जांच की गई। जांच टीमों ने तीसरे दिन डेल्टा 1, 2 व 3, ईटा वन व टू, पाई वन, सेक्टर 33, स्वर्णनगरी, थीटा वन, म्यू वन, टू व थ्री, सिग्मा, जैतपुर और साकीपुर के 6% प्लॉट आदि एरिया और ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित आवासीय सोसायटियों में पानी की गुणवत्ता की जांच की।
टीम अपने साथ पानी की जांच के लिए जरूरी उपकरण जैसे टीडीएस मीटर, पीएच व क्लोरीन किट साथ लेकर जा रही है। टीम को सप्लाई के पानी में ये सभी मानकों के अनुरूप ही मिले हैं। जांच टीमें जहां भी गई, वहां के निवासियों से सीधा संपर्क कर फीडबैक भी लिया। निवासियों ने प्राधिकरण के इस रैंडम जांच अभियान की सराहना भी की। प्राधिकरण के एसीईओ सुनील कुमार सिंह और एसीईओ सुमित यादव खुद इस अभियान की निगरानी कर रहे हैं।
बता दें कि, पूरे शहर में पानी की गुणवत्ता परखने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने एहतियात के तौर पर अलग-अलग जगहों से रैंडम जांच कराने के निर्देश दिए हैं। वर्क सर्किल वाइज 8 टीमें बनाकर जांच शुरू कराई जा रही है। जांच टीमें जलापूर्ति लाइनों में किसी भी प्रकार के लीकेज, सीवर चोकिंग, ओवरफ्लो, ड्रेन-सीवर-पानी कनेक्शन प्वाइंट्स की गहन जांच कर रही है।
दूषित पानी आने से मचा हड़कंप
ग्रेटर नोएडा के विभिन्न सेक्टरों में पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से दूषित पानी पीने के कारण सैकड़ों लोग बीमार पड़ चुके हैं। रविवार को सेक्टर बीटा-1 के ई-ब्लॉक में सुबह पानी की सप्लाई के दौरान गंदा, मटमैला और बदबूदार पानी आने से सेक्टरवासियों में हड़कंप मच गया। जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया गया है। सेक्टर बीटा-1 आरडब्ल्यूए के महासचिव हरेंद्र भाटी ने आरोप लगाया कि दूषित पानी की सप्लाई के लिए प्राधिकरण जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि सेक्टर में सीवर ओवरफ्लो होकर सप्लाई पाइपों से जुड़ रहा है। जगह-जगह सीवर का गंदा पानी जमा है और लगातार शिकायतों के बावजूद कर्मचारी समस्या का स्थायी समाधान नहीं कर पा रहे हैं।




